Denemek ALTIN - Özgür
पूर्व दिशा में निर्मित भवन और उसका वास्तुशास्त्रीय महत्त्व
Jyotish Sagar
|August 2025
पूर्व दिशा में सात्विक कर्म करना शुभ माना गया है। इसलिए इस दिशा में मन्दिर निर्माण, पूजाघर, बच्चों की पढ़ाई का कमरा ( स्टडी रूम) इत्यादि का निर्माण करना शुभ माना गया है।
वास्तुशास्त्र में सभी दिशाओं का अलग-अलग महत्त्व होता है। उसी प्रकार पूर्व दिशा का भी विशेष महत्त्व होता है। मुख्य रूप से चार दिशाएँ (पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण) और चार विदिशा (ईशान, आग्नेय, नैर्ऋत्य और वायव्य) होती है। इन्हीं आठ दिशाओं के अन्तर्गत वास्तु का पूरा सिद्धान्त प्रतिपादित होता है। इस आलेख में हम पूर्व दिशा के गुण-दोष एवं महत्त्व के बारे में विस्तार से जानेंगे। पूर्व दिशा के स्वामी सूर्यदेव और इसके देवता इन्द्रदेव हैं। सूर्य की पहली किरण सर्वप्रथम पूर्व दिशा में ही पड़ती है। इसलिए इस दिशा का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
पूर्व दिशा का सम्बन्ध हमारे घर की सुख-समृद्धि, यश, कीर्ति और स्वास्थ्य से होता है। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि पूर्व दिशा में किसी भी प्रकार का वास्तुदोष नहीं हो। पूर्व दिशा का सम्बन्ध उत्तर एवं दक्षिण दोनों दिशाओं के साथ होता है और पूर्व की सीमा उत्तर तथा दक्षिण दोनों दिशाओं को स्पर्श करती है। ऐसे में उत्तर दिशा के साथ जो कोण बनता है, उसे ईशान कोण और दक्षिण दिशा के साथ जो कोण बनता है, उसे अग्निकोण कहते हैं।
पूर्व दिशा में E-1 से लेकर E-8 तक आठ पद होते हैं, जिनके नाम निम्नलिखित हैं—
1. ईश अथवा शिखी पूर्व दिशा का प्रथम पद होता है, जिसे हम आजकल E-1 के नाम से भी जानते हैं। ईशान कोण के दो पदों (N-1 एवं E-1) का यह एक भाग है। इस दिशा पर निर्माण करना शुभ नहीं होता है। इस पद पर बने द्वार पद-प्रतिष्ठा एवं मान-सम्मान खराब कर देते हैं।
2. पर्जन्य यह पूर्व दिशा का दूसरा पद होता है। इसे E-2 के नाम से जानते हैं। इस पद पर द्वार होने से घर में कन्या सन्तति की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त इस पद सेद्वार होने पर अधिक मात्रा में खर्चे बढ़ते हैं, जिससे धन का व्यय अधिक होता है। इसलिए इस पद को भी वास्तु में नकारात्मक श्रेणी में रखा गया है।
Bu hikaye Jyotish Sagar dergisinin August 2025 baskısından alınmıştır.
Binlerce özenle seçilmiş premium hikayeye ve 9.000'den fazla dergi ve gazeteye erişmek için Magzter GOLD'a abone olun.
Zaten abone misiniz? Oturum aç
Jyotish Sagar'den DAHA FAZLA HİKAYE
Jyotish Sagar
क्या लिखा है हमारे भाग्य में...?
ज्योतिष और प्रारब्ध
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
ग्रहों के अंशों का महत्त्व
लग्न की डिग्री बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। कुण्डली में जितने भी ग्रहों की डिग्री लग्न की डिग्री के आस-पास होते हैं, वे सभी अपना पूर्ण फल देने में समर्थ होते हैं।
8 mins
May 2026
Jyotish Sagar
जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें मनाएँ कैसे?
मनुष्य का पूरा जीवन 9 ग्रहों की 27 नक्षत्रों में चाल और दृष्टि पर टिका हुआ है। सामान्य भाषा में कहें, तो जब ग्रहों की कृपा होती है, तो मनुष्य बलवान् हो जाता है और जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो वह भिखारी भी बन जाता है। इस आलेख में हम बता रहे हैं कि जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें कैसे मनाएँ?
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कन्या लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र एवं शनि के फल
कैसे करें सटीक फलादेश (भाग-227)
7 mins
May 2026
Jyotish Sagar
श्रीशंकराचार्यकृत श्रीनृसिंहभुजङ्गस्तोत्रम्
(मूल मातृका/पाण्डुलिपि से प्रथम बार प्रकाशित एवं अनूदित)
6 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कोकिलावन जहाँ शनिदेव रो पड़े श्रीकृष्ण के दर्शन को!
मथुरा जनपद की पावन भूमि, जहाँ प्रत्येक कण में श्रीकृष्ण की लीलाओं की सुगन्ध व्याप्त है, वहीं कोसी और नन्दगाँव के मध्य स्थित कोकिलावन दिव्य और रहस्यमयी तीर्थस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
3 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कैसी रहेगी सम्राट चौधरी की सरकार?
शपथ ग्रहण कुण्डली विश्लेषण
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कुण्डली में विवाह, सन्तान एवं दाम्पत्य सुख : एक पर्यवेक्षण
मनुष्य जीवन का सबसे कोमल, जटिल और जरूरी पक्ष होता है- विवाह, सन्तान और दाम्पत्य जीवन। यह वह पक्ष है जहाँ प्रेम, आत्मीयता, त्याग और संघर्ष की असली परीक्षा होती है।
5 mins
May 2026
Jyotish Sagar
नीचराशिस्थ बुध के फल
जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन (भाग-21)
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
वोट से क्रान्ति के नायक पीटर माग्यार
जन्मपत्रिका विश्लेषण
9 mins
May 2026
Listen
Translate
Change font size

