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युद्ध का दूसरा दिन मूच्छिंत हुए लक्ष्मण जी
Jyotish Sagar
|July 2025
गगातट पर चल रही रामकथा का 26वाँ दिन आज से आरम्भ हो रहा है। स्वामी जी की प्रसिद्धि अब चारों तरफ फैल चुकी है, जिसके चलते श्रोताओं की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।
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आयोजकों को आज अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसलिए उन्होंने पाण्डाल का और अधिक विस्तार कर दिया है। बैठने की व्यवस्था बढ़ा दी गई है। सुबह से ही स्वयंसेवक व्यवस्थाओं में लगे हुए हैं। जैसे-जैसे कथा का समय समीप आ रहा है, वैसे-वैसे आने वाले लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है। झुण्ड के झुण्ड कथा पाण्डाल की ओर बढ़ रहे हैं। मुख्य मार्ग से ही इस बात का पता लग जाता है कि यहाँ गंगा तट पर कथा का विशाल आयोजन हो रहा है। गाड़ियों की पार्किंग का स्थल बढ़ चुका है और मार्ग में भी एक कि.मी. तक वाहनों की कतारें देखी जा सकती हैं। सही समय पर स्वामी जी मंच पर आते हैं और सभी श्रोताओं का अभिवादन स्वीकार कर व्यास गद्दी पर बैठकर गुरु का स्मरण करते हैं। फिर आद्यकवि वाल्मीकि जी एवं तुलसीदास जी को प्रणाम कर हनुमान जी को कथा श्रवण के लिए आमंत्रण देकर उन्हें आसन पर विराजमान करते हैं। फिर श्रीराम दरबार की स्तुति के बाद श्रीरामचरितमास के बालकाण्ड के आरम्भ में 'जो सुमिरत सिधि होइ...' स्तुति का सस्वर पाठ करते हैं। उसके बाद कथा का आरम्भ करते हैं...
स्वामी जी कहते हैं कि “लंकाकाण्ड की कथा चल रही है। पहले दिन का युद्ध सम्पन्न हो चुका है और लंका में रावण अपने मंत्रियों एवं सेनापतियों के साथ बैठकर पहले दिन के युद्ध का मूल्यांकन कर रहा है। पहले दिन युद्ध में क्षति का आकलन करते हुए रावण ने कहा कि ‘वानरों ने हमारी आधी सेना समाप्त कर दी है। अब आप सभी का क्या विचार है?'
Bu hikaye Jyotish Sagar dergisinin July 2025 baskısından alınmıştır.
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