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दस महाविद्याएँ और धूमावती देवी का आध्यात्मिक महत्त्व

Jyotish Sagar

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June 2025

ऐसा कहा जाता है कि जब हिमालय के यहाँ सती देवी का अपमान हुआ, तो उन्होंने यज्ञ में ही अपने शरीर की आहुति दे दी और उस धुएँ से निकली हुई आकृति 'धूमावती माई' हैं।

- डॉ. सौरभ दीक्षित

दस महाविद्याएँ और धूमावती देवी का आध्यात्मिक महत्त्व

साल में दो बार हम नवरात्र मानते हैं। इन नौ दिनों में नौ देवियों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्र में गुजरात में माँ अम्बे की भक्ति में पारम्परिक नृत्य 'गरबा' होता है। यह भी एक भक्ति का ही माध्यम है। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वहाँ-वहाँ सिद्धपीठ बनते चले गए। इस प्रकार कुल 51 सिद्धपीठ हैं। कई स्थानों पर 64 योगिनी के मन्दिर भी हैं। ये चौंसठ योगिनियाँ भैरव जी और हनुमान जी के साथ हैं। चौंसठ योगिनी के मन्दिर (मुरैना, जबलपुर और ओडिशा) में है। प्रत्येक योगिनी एक विद्या का प्रतिनिधित्व करवाती हैं। ये दस महाविद्याएँ कहलाती हैं। साथ ही भारतीय संस्कृति में ग्राम देवता और कुलदेवी की मान्यता है।

ये दस महाविद्याएँ हैं—1. काली, 2. तारा, 3. त्रिपुरसुन्दरी, 4. भुवनेश्वरी, 5. भैरवी, 6. छिन्नमस्ता, 7. धूमावती, 8. बगलामुखी, 9. मातंगी एवं 10. कमला।

धूमावती देवी

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