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घर में पानी का सही स्थान बनेगा भाग्योदय में सहायक

Jyotish Sagar

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February 2024

उत्तर–पूर्व (NE) में ओवरहैड वाटर टैंक नहीं होना चाहिए, क्योंकि यदि आपके घर में इस तरह की व्यवस्था है, तो इससे आपका ईशान कोण भारी हो जाएगा, जो वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं है।

- डॉ. रविन्द्र दाधीच

घर में पानी का सही स्थान बनेगा भाग्योदय में सहायक

हमारा शरीर पाँच तत्त्वों से मिलकर बना है और इन्हीं पाँच तत्त्वों में से एक तत्त्व जल है। वास्तु भी इन पाँच तत्त्वों पर ही काम करता है। जिस प्रकार से शरीर के इन पंचतत्त्वों का संतुलन गड़बड़ होने पर शरीर में दोष पैदा हो जाते हैं। इन दोषों को आयुर्वेद में ‘त्रिदोष’ (वातदोष, पित्तदोष, कफदोष) कहते हैं। इसी प्रकार हमारी वास्तु में यदि इन पाँच तत्त्वों का संतुलन सही नहीं है, तो उसे 'वास्तुदोष' कहते हैं।

जल ही जीवन है और इसके बिना जीवन सम्भव नहीं, तो प्रस्तुत आलेख में हम पानी की ही बात करेंगे, जो सबसे ज्यादा आवश्यक है। वास्तु में जल तत्त्व के लिए विशेष स्थान का निर्धारण किया गया है। ऐसे में यदि जल सही स्थिति में होगा, तो घर तथा व्यापार में शान्ति रहेगी। यह आपके घर-परिवार और व्यापार के लिए हमेशा तरक्की के रास्ते खोलता है, क्योंकि जल की प्रवृत्ति ही आगे बढ़ने की होती है। जल तत्त्व में पानी का टैंक, कुआँ, बोरिंग, रेन वाटर हारवेस्टिंग, फाउण्टेन, वाटर फाल, स्वीमिंगपूल, वाटर बॉडी आदि तथा फैक्ट्री में चिलर, फायर टैंक अगर कहीं पानी इकट्ठा भी हो रहा है, तो उसे भी शामिल किया जाता है।

वास्तु की जो हमारी आठ दिशाएँ हैं, उन आठ दिशाओं में जल के किस प्रकार के अच्छे-बरे परिणाम मिलते हैं? यह हमारे शास्त्र में इस प्रकार वर्णित किया गया है-

कूपे वास्तोर्मध्यदेशेऽर्थनाशस्त्वेशान्यादौ पुष्टिरैश्वर्यवृद्धिः। सूनोर्नाशः स्त्रिविनाशो मृतिश्च सम्पत्पीडा शत्रुतः स्यात् च सौख्यम्।। (मुहूर्त चिन्तामणि)

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