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जौब जरूरी या घर के अनप्रोडक्टिव काम
Grihshobha - Hindi
|July First 2025
पुराने समय से दिमाग में यह बात बैठा दी गई थी कि पुरुषों को ऑफिस में काम करने के लिए बनाया गया है और महिलाओं को घर पर मेहनत करने के लिए. आज के समय यह कितना प्रासंगिक है...
चीन की एक अदालत ने कुछ समय पहले तलाक से जुड़े एक मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया. कोर्ट ने एक व्यक्ति को निर्देश दिया कि वह 5 साल तक चली अपनी शादी के दौरान पत्नी द्वारा किए गए घरेलू काम के बदले में उसे मुआवजा दे. इस मामले में महिला को ₹5.65 लाख दिए जाने का फैसला हुआ. इस फैसले ने चीन समेत दुनियाभर में बड़ी बहस को जन्म दिया.
कुछ लोगों का मानना था कि महिला घर के काम के बदले में मुआवजे के रूप में कुछ भी लेने की हकदार नहीं है. वहीं कुछ लोगों के अनुसार जब महिला अपने कैरियर से जुड़े अवसरों को त्याग कर रोज घंटों घरेलू काम करती है तो उसे मुआवजा क्यों नहीं मिलना चाहिए.
इस से कुछ समय पहले भारत की सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में लिखा था कि घर का काम परिवार की आर्थिक स्थिति में वास्तविक रूप से योगदान करता है और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में भी योगदान करता है.
दरअसल, चीन से ले कर भारत और पश्चिमी दुनिया के देशों में भी अदालतें बारबार महिलाओं द्वारा की गई अनपेड़ लेबर को आर्थिक उत्पादन के रूप में स्थापित करने वाले फैसले देती रही हैं. लेकिन इस के बावजूद घर के काम को जीडीपी में योगदान के रूप में नहीं देखा जाता है. यही नहीं समाज घर के काम को वह अहमियत नहीं देता है जितनी नौकरी या व्यवसाय में किए गए काम को देता है.
सवाल अहम है
ऐसे में सवाल उठता है कि महिलाएं घर के अनप्रोडक्टिव काम छोड़ कर नौकरी या व्यवसाय क्यों न शुरू करें ? जब उन के पास स्किल है, काबिलीयत है तो वे क्यों न ऐसे काम करें जिन में वे अपनी स्किल दिखा कर अच्छी कमाई कर आत्मनिर्भर बन सकें? घर के कामों में पूरे दिन समय बरबाद कर के जब उन्हें कुछ हासिल नहीं हो रहा तो वे इन कामों को हाउस हैल्प के द्वारा करा कर अपने समय का सदुपयोग कर सकती हैं, पैसे कमा सकती हैं और अपनी कमाई के कुछ रुपए हाउस हैल्प को दे कर अपने काम का बोझ हलका कर सकती हैं.
उधर जिन कामों के लिए उन्हें सैलरी नहीं मिल रही थी वही काम जब हाउस हैल्प यानी कामवाली करती है तो उसे भी कमाई का अवसर मिलता है. यानी वही काम एक स्त्री अपने घर पर करे तो वह प्रोडक्टिव काम नहीं जबकि कामवाली करे तो वह प्रोडक्टिव हो जाता है.
घरेलू काम की अहमियत नहीं
This story is from the July First 2025 edition of Grihshobha - Hindi.
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