Facebook Pixel योग से शक्ति-संचय, भोग से विनाश! | Rishi Prasad Hindi - religious-spiritual - Read this story on Magzter.com
Go Unlimited with Magzter GOLD

Go Unlimited with Magzter GOLD

Get unlimited access to 10,000+ magazines, newspapers and Premium stories for just

$149.99
 
$74.99/Year

Try GOLD - Free

योग से शक्ति-संचय, भोग से विनाश!

Rishi Prasad Hindi

|

April 2025

मति को निर्मल बनाना चाहते हो तो संयमी बनो और ज्ञानी महापुरुषों का संग करो, सदुपदेश सुनते रहो। भोगवृत्तियों को रोकना ही संयम है।

- संत पथिकजी

योग से शक्ति-संचय, भोग से विनाश!

जो असत्य से विमुख करके सत्य के सम्मुख कर दे वही सदुपदेश है। सर्वोत्तम पद की प्राप्ति चाहते हो तो सर्वत्याग* करने पर ही प्राप्त होगा। यदि तुम त्याग न करोगे तो तुम ही त्यागे जाओगे।

मृत्यु के दुःख से बचना चाहते हो तो प्राणांत के प्रथम ही इच्छाओं का त्याग कर दो। इच्छाओं के रहते इच्छित वस्तु नष्ट होने से ही दुःख होता है इसलिए वस्तुओं के रहते उनकी इच्छा को मिटा देना दुःखद मोहपाश से मुक्त हो जाना है।

शाश्वत प्रीति का रस लेना है तो अपने जीवन के स्वामी को जानकर जीवन का भोग करो और नित्य मुक्ति का आनंद चाहते हो तो संसार के स्वामी को जान के अपना कुछ न मान के संसार से विरक्त हो जाओ।

MORE STORIES FROM Rishi Prasad Hindi

Rishi Prasad Hindi

सांस्कृतिक सम्पत्ति-विनाशक विकास-कार्यों से सांस्कृतिक सम्पत्ति की सुरक्षा होनी चाहिए : यूनेस्को

योगी अरविंदजी कहते थे : ''जब यह कहा जाता है कि भारत विस्तार करेगा और अपने को व्यापक बनायेगा तब उसका अर्थ यह है कि सनातन धर्म स्वयं का विश्व में विस्तार और फैलाव करेगा।

time to read

3 mins

April 2026

Rishi Prasad Hindi

अद्भुत है भगवत्कथा-सत्संग की महिमा

कथा त्रिवेणी संगम... ... नेणे वर्णं या सुखां ॥

time to read

1 min

April 2026

Rishi Prasad Hindi

इसमें हानि-लाभ किसका ?

यह संक्षिप्त जीवन-चरित्र है उनका जिन्हें विश्व संत श्री आशारामजी बापू के नाम से जानता है ।

time to read

2 mins

April 2026

Rishi Prasad Hindi

इन ६ गलतियों से बचेंगे तो स्वास्थ्य में लगेंगे ४ चाँद व छक्के

भोजन के बाद पेट का भारी होना, अफरा (गैस), अम्लपित्त (हाइपर एसिडिटी), पाचन ठीक से न होना आदि समस्याओं से यदि आप परेशान हैं तो हो सकता है आप भी ये गलतियाँ कर रहे हों जो अधिकांश लोग अनजाने में करते हैं।

time to read

2 mins

April 2026

Rishi Prasad Hindi

अद्वितीय वैश्विक क्रांति का जन्म

संतत्व को पाये हुए अपने शिष्य को साँईं लीलाशाहजी ने डीसा में एक कुटीर में रहने की आज्ञा दी ।

time to read

1 mins

April 2026

Rishi Prasad Hindi

महान लक्ष्य और हिमालय-सी अडिगता

इन बालक का भगवद्भक्ति की और गहरा झुकाव था। खेलने-कूदने की उम्र में ये घंटों तक ईश्वर के ध्यान, चिंतन में तल्लीन हो जाते ।

time to read

2 mins

April 2026

Rishi Prasad Hindi

Rishi Prasad Hindi

अर्धांगिनी की धर्मशक्ति

जो स्वार्थरहित सेवा करते हैं, भगवान और समाज के बीच सेतु बनते हैं वे कर्मयोगी हो जाते हैं ।

time to read

3 mins

April 2026

Rishi Prasad Hindi

Rishi Prasad Hindi

किया हुआ सत्संग व्यर्थ नहीं जाता

एक शिष्य रहता था गुरुजी के पास।

time to read

1 mins

April 2026

Rishi Prasad Hindi

विलक्षण दूरदर्शिता

आज राष्ट्रीय या वैश्विक स्तर पर ऐसी कई समस्याएँ हैं जिनको बड़ी चुनौती समझा जा रहा है अथवा कुछ ऐसी हैं कि गम्भीर होते हुए भी जिनका संज्ञान ही नहीं लिया जा रहा है, उनका प्रायोगिक एवं सशक्त समाधान इन संत ने वर्षों पूर्व ही दे दिया था।

time to read

4 mins

April 2026

Rishi Prasad Hindi

१००० मेहमानों को दिलायी ऋषि प्रसाद की पंचवार्षिक सदस्यता

उपहार में दिया दिव्य ज्ञान

time to read

1 min

April 2026

Listen

Translate

Share

-
+

Change font size