Try GOLD - Free
योग से शक्ति-संचय, भोग से विनाश!
Rishi Prasad Hindi
|April 2025
मति को निर्मल बनाना चाहते हो तो संयमी बनो और ज्ञानी महापुरुषों का संग करो, सदुपदेश सुनते रहो। भोगवृत्तियों को रोकना ही संयम है।
जो असत्य से विमुख करके सत्य के सम्मुख कर दे वही सदुपदेश है। सर्वोत्तम पद की प्राप्ति चाहते हो तो सर्वत्याग* करने पर ही प्राप्त होगा। यदि तुम त्याग न करोगे तो तुम ही त्यागे जाओगे।
मृत्यु के दुःख से बचना चाहते हो तो प्राणांत के प्रथम ही इच्छाओं का त्याग कर दो। इच्छाओं के रहते इच्छित वस्तु नष्ट होने से ही दुःख होता है इसलिए वस्तुओं के रहते उनकी इच्छा को मिटा देना दुःखद मोहपाश से मुक्त हो जाना है।
शाश्वत प्रीति का रस लेना है तो अपने जीवन के स्वामी को जानकर जीवन का भोग करो और नित्य मुक्ति का आनंद चाहते हो तो संसार के स्वामी को जान के अपना कुछ न मान के संसार से विरक्त हो जाओ।
This story is from the April 2025 edition of Rishi Prasad Hindi.
Subscribe to Magzter GOLD to access thousands of curated premium stories, and 10,000+ magazines and newspapers.
Already a subscriber? Sign In
MORE STORIES FROM Rishi Prasad Hindi
Rishi Prasad Hindi
सांस्कृतिक सम्पत्ति-विनाशक विकास-कार्यों से सांस्कृतिक सम्पत्ति की सुरक्षा होनी चाहिए : यूनेस्को
योगी अरविंदजी कहते थे : ''जब यह कहा जाता है कि भारत विस्तार करेगा और अपने को व्यापक बनायेगा तब उसका अर्थ यह है कि सनातन धर्म स्वयं का विश्व में विस्तार और फैलाव करेगा।
3 mins
April 2026
Rishi Prasad Hindi
अद्भुत है भगवत्कथा-सत्संग की महिमा
कथा त्रिवेणी संगम... ... नेणे वर्णं या सुखां ॥
1 min
April 2026
Rishi Prasad Hindi
इसमें हानि-लाभ किसका ?
यह संक्षिप्त जीवन-चरित्र है उनका जिन्हें विश्व संत श्री आशारामजी बापू के नाम से जानता है ।
2 mins
April 2026
Rishi Prasad Hindi
इन ६ गलतियों से बचेंगे तो स्वास्थ्य में लगेंगे ४ चाँद व छक्के
भोजन के बाद पेट का भारी होना, अफरा (गैस), अम्लपित्त (हाइपर एसिडिटी), पाचन ठीक से न होना आदि समस्याओं से यदि आप परेशान हैं तो हो सकता है आप भी ये गलतियाँ कर रहे हों जो अधिकांश लोग अनजाने में करते हैं।
2 mins
April 2026
Rishi Prasad Hindi
अद्वितीय वैश्विक क्रांति का जन्म
संतत्व को पाये हुए अपने शिष्य को साँईं लीलाशाहजी ने डीसा में एक कुटीर में रहने की आज्ञा दी ।
1 mins
April 2026
Rishi Prasad Hindi
महान लक्ष्य और हिमालय-सी अडिगता
इन बालक का भगवद्भक्ति की और गहरा झुकाव था। खेलने-कूदने की उम्र में ये घंटों तक ईश्वर के ध्यान, चिंतन में तल्लीन हो जाते ।
2 mins
April 2026
Rishi Prasad Hindi
अर्धांगिनी की धर्मशक्ति
जो स्वार्थरहित सेवा करते हैं, भगवान और समाज के बीच सेतु बनते हैं वे कर्मयोगी हो जाते हैं ।
3 mins
April 2026
Rishi Prasad Hindi
किया हुआ सत्संग व्यर्थ नहीं जाता
एक शिष्य रहता था गुरुजी के पास।
1 mins
April 2026
Rishi Prasad Hindi
विलक्षण दूरदर्शिता
आज राष्ट्रीय या वैश्विक स्तर पर ऐसी कई समस्याएँ हैं जिनको बड़ी चुनौती समझा जा रहा है अथवा कुछ ऐसी हैं कि गम्भीर होते हुए भी जिनका संज्ञान ही नहीं लिया जा रहा है, उनका प्रायोगिक एवं सशक्त समाधान इन संत ने वर्षों पूर्व ही दे दिया था।
4 mins
April 2026
Rishi Prasad Hindi
१००० मेहमानों को दिलायी ऋषि प्रसाद की पंचवार्षिक सदस्यता
उपहार में दिया दिव्य ज्ञान
1 min
April 2026
Listen
Translate
Change font size

