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शिवलिंग पर जल चढाने का माहात्म्य
Jyotish Sagar
|July 2025
कुछ लोगों को पता नहीं होता कि शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है? शिवलिंग पर जल कौनसे बर्तन से चढ़ाना चाहिए? जल चढ़ाते समय मुँह किस ओर होना चाहिए? शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका क्या है और जल चढ़ाते समय कौनसा मन्त्र बोलना चाहिए? अतः यहाँ यही जानकारी प्रस्तुत है-
समुद्र मन्थन के बारे मे हम सब जानते हैं। जब देवता और राक्षस समुद्र मन्थन कर रहे थे, तो समुद्र से भयानक विष निकलने लगा था। उस विष को भगवान् शिव ने धारण किया था, लेकिन उस विष के प्रभाव से शिवजी का शरीर बहुत गर्म हो गया और उनके शरीर से ज्वालाएँ निकलने लगीं।
उनकी गर्मी शान्त करने के लिए सभी लोग उन पर जल चढ़ाने लगे। जब तक विष निकलता रहा, तब तक शिवजी उस विष को ग्रहण करते रहे और गर्मी शान्त करने के लिए सभी लोग उन पर जल गिराते रहे। इससे शिवजी की गर्मी शान्त हुई और वे बड़े प्रसन्न हुए। तब उन्होंने निर्णय लिया कि जब भी कोई उन पर जल चढ़ाएगा, वह उसके जीवन से प्रत्येक प्रकार का संकट यानी विष ग्रहण कर लेंगे। इसीलिए संकट निवारण, शिवजी की प्रसन्नता तथा आशीर्वाद के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है।
कभी भी भगवान् शिव को जल तेजी से नहीं चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों में भी बताया गया है कि शिवजी को जलधारा अत्यन्त प्रिय है। इसलिए जल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि जल के पात्र से धार बनाते हुए धीरे से जल अर्पित करें। पतली जलधारा शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान् शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
This story is from the July 2025 edition of Jyotish Sagar.
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