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भारतीय संस्कृति में परम सत्ता के परम योगी भगवान् परशुराम
Jyotish Sagar
|April 2025
भारतीय संस्कृति एवं धर्मशास्त्रों में चार युगों का वर्णन प्राप्त है। प्रत्येक युग में धर्म की स्थापना, असुरों के दमन के लिए भगवान् विष्णु के अवतार अवतीर्ण का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है।
भगवान् विष्णु के मुख्यावतार मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, श्रीराम (रघुनन्दन), कृष्ण, बुद्ध और कल्कि हैं। शास्त्रों में उल्लिखित युगों का श्रीगणेश अक्षया तृतीया से माना जाता है। अक्षया तृतीया को भगवान् परशुराम के प्राकट्य उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। प्रतिमा विज्ञान में विष्णु के अवतारों के तीन भेद मिलते हैं-पूर्णावतार, आवेशावतार एवं अंशावतार। आवेशावतार से निर्देश भगवान् परशुराम हैं। कथानुसार हैहयराज सहस्रबाहु महर्षि जमदग्नि (यमदग्नि) के आश्रम से लोभवश कामधेनु को बलपूर्वक ले गए। यह अन्याय परशुराम सह नहीं सके और परशु लेकर सहस्रार्जुन से युद्ध कर कामधेनु को लौटा लाए। परशुराम योग, वेद एवं नीति शास्त्र में पारंगत थे। योगी एवं योद्धा के स्वरूप में परशुराम का जीवन अतुल्य एवं अद्भुत माना गया है।
This story is from the April 2025 edition of Jyotish Sagar.
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