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शनि साढ़ेसाती और मनुष्य के जीवन पर प्रभाव
Jyotish Sagar
|June 2024
ज्योतिष शास्त्र अति प्राचीन काल से जाना जाता है। सिद्धान्त, संहिता तथा होरा नामक तीन स्कन्धों से युक्त इसे 'वेदों का नेत्र' कहा गया है। वैसे तो वेद के दो नेत्र होते हैंस्मृति और ज्योतिष।
जिस भाँति प्रत्येक मनुष्य के शरीर में नेत्र प्रधान होते हैं, उसी भाँति ज्योतिष शास्त्र भी वेदों में प्रधान है। अक्सर यही देखा जाता है कि जिस जातक के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति जिस प्रकार से रहती है, मनुष्य का भाग्योदय भी उन्हीं ग्रहों के मुताबिक होता है। मनुष्य की शारीरिक बनावट, भाषा शैली, व्यवहार, विद्या तथा कार्यकुशलता भी उसी भाँति रहती है। व्यक्ति का भाग्योदय भी ग्रहों के मुताबिक ही होता है। जातक का पारिवारिक सुख, मित्रता, तीर्थयात्रा, मृत्यु आदि का विचार भी ग्रहों मुताबिक ही किया जाता है। इसके अलावा किसी अदृश्य शक्ति द्वारा भी ये स्वयं संचालित होते रहते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में कुछ ग्रह ऐसे भी हैं, जो अपना असर व्यक्ति पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाते हैं। इन ग्रहों में से यहाँ आप को शनि ग्रह के सन्दर्भ में जानकारी देंगे। जैसा कि सर्वविदित है कि शनि एक ग्रह का नाम है, जिसे सुनते ही व्यक्ति भयभीत हो जाता है तथा मनोवैज्ञानिक तनाव अहसास करता है।
पहले कुछ जानकारियाँ शनि की साढ़ेसाती के बारे में आवश्यक है। इसके पूर्व शनि का परिचय अनेक भाषाओं में नाम तथा आकाशीय स्थिति के बारे में जानकारी जरूरी है। शनि को 'शनैश्चर' भी कहते हैं। यह एक वायु तत्त्व और पृथ्वी तत्त्व प्रधान ग्रह है। शनि को ज्योतिष शास्त्र में 'अर्कि' कहते हैं। अंग्रेजी में इसे 'शेटरन', अरबी में 'जुदुक्त' तथा फारसी में 'दवान' कहा जाता है। शनि को ‘असित्’, ‘छायात्मज’, ‘मन्द', 'सूर्यपुत्र', 'रविज’, 'पंगु', 'शौरि ' तथा 'भास्कर' आदि नामों से भी जाना जाता है। जन्मपत्रिका में यह मकर तथा कुम्भ राशि का स्वामी होता है। तुला लग्न का सबसे कारक ग्रह माना जाता है।
शनि की आकाशीय स्थिति क्या है?
This story is from the June 2024 edition of Jyotish Sagar.
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