Try GOLD - Free
सूर्य-चन्द्रमा की युति एक विश्लेषण
Jyotish Sagar
|January 2024
चन्द्रमा के अस्त होने के बावजूद भी कई जातक जीवन में उच्चस्तरीय सफलता प्राप्त करते हुए देखे जाते हैं।
श्री मद्भागवत् गीता के दूसरे अध्याय में । भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं—
अविनाशि त तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम् ।
विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति ॥
अर्थात् पूरे शरीर में व्याप्त अविनाशी आत्मा को नष्ट करने में कोई भी समर्थ नहीं है। अजर, अमर और अनश्वर चेतना ही आत्मा है। आत्मा का निवास ही शरीर को जीवित रखता है।
यह एक परम सत्य है कि सूर्य की ऊर्जा और प्रकाश ही संसार के प्रत्येक जीव में जीवन का संचार करती है। तभी तो हमारे मनीषियों ने वेदों में सूर्य को 'आत्मा' की संज्ञा प्रदान की गई है। सूर्य का एक नाम आदित्य भी है, जिसका न आदि है और न ही अन्त, जो सदा सर्वदा व्याप्त है।
ज्योतिष में सूर्य को राजसी पद प्राप्त है। सूर्य ग्रहों का राजा है। तभी तो बाकी सारे ग्रह चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि सूर्य के करीब आते ही अस्त हो जाते हैं। चन्द्रमा-मन, मंगल-शक्ति, बुध-बुद्धि, बृहस्पति-ज्ञान, शुक्र ऐश्वर्य और शनि दु:ख का कारक है।
अन्य शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि आत्मा के तेज के समक्ष बाकी सब कुछ अस्तित्व विहीन अथवा नगण्य हो जाते हैं।
चंचलं हि मनः कृष्णं प्रमाथि बलवद् दृढम् ।
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ॥
श्रीमद्भगवत्गीता में अर्जुन भगवान् श्रीकृष्ण से कहते हैं, “हे कृष्ण! मन बड़ा ही चंचल, अशांत, हठी और बलवान् है। उसको वश में करना अत्यन्त कठिन है।” मन को मस्तिष्क का ही एक भाग माना जा सकता है, जिसकी सहायता से मनुष्य चिन्तन करता है। मन ही मनुष्य को स्मरण शक्ति, निर्णय करने की बुद्धि, इन्द्रियग्राह्यता, एकाग्रता, व्यवहारकुशलता, अंतर्दृष्टि आदि के लिए के लिए सक्षम बनाता है। मन ही भावनाओं का केन्द्र भी होता है, लेकिन मन चंचल होता है, तभी तो मनुष्य की स्मरण शक्ति, भावनाएँ, इन्द्रिय सुख प्राप्त करने की इच्छा, एकाग्रता सब-कुछ परिवर्तनशील है, नश्वर है। मन भौतिक है, उसका अस्तित्व तन से ही है। तन नहीं, तो मन भी नहीं, लेकिन आत्मा तो दिव्य है, शाश्वत है।
This story is from the January 2024 edition of Jyotish Sagar.
Subscribe to Magzter GOLD to access thousands of curated premium stories, and 10,000+ magazines and newspapers.
Already a subscriber? Sign In
MORE STORIES FROM Jyotish Sagar
Jyotish Sagar
क्या लिखा है हमारे भाग्य में...?
ज्योतिष और प्रारब्ध
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
ग्रहों के अंशों का महत्त्व
लग्न की डिग्री बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। कुण्डली में जितने भी ग्रहों की डिग्री लग्न की डिग्री के आस-पास होते हैं, वे सभी अपना पूर्ण फल देने में समर्थ होते हैं।
8 mins
May 2026
Jyotish Sagar
जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें मनाएँ कैसे?
मनुष्य का पूरा जीवन 9 ग्रहों की 27 नक्षत्रों में चाल और दृष्टि पर टिका हुआ है। सामान्य भाषा में कहें, तो जब ग्रहों की कृपा होती है, तो मनुष्य बलवान् हो जाता है और जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो वह भिखारी भी बन जाता है। इस आलेख में हम बता रहे हैं कि जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें कैसे मनाएँ?
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कन्या लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र एवं शनि के फल
कैसे करें सटीक फलादेश (भाग-227)
7 mins
May 2026
Jyotish Sagar
श्रीशंकराचार्यकृत श्रीनृसिंहभुजङ्गस्तोत्रम्
(मूल मातृका/पाण्डुलिपि से प्रथम बार प्रकाशित एवं अनूदित)
6 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कोकिलावन जहाँ शनिदेव रो पड़े श्रीकृष्ण के दर्शन को!
मथुरा जनपद की पावन भूमि, जहाँ प्रत्येक कण में श्रीकृष्ण की लीलाओं की सुगन्ध व्याप्त है, वहीं कोसी और नन्दगाँव के मध्य स्थित कोकिलावन दिव्य और रहस्यमयी तीर्थस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
3 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कैसी रहेगी सम्राट चौधरी की सरकार?
शपथ ग्रहण कुण्डली विश्लेषण
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कुण्डली में विवाह, सन्तान एवं दाम्पत्य सुख : एक पर्यवेक्षण
मनुष्य जीवन का सबसे कोमल, जटिल और जरूरी पक्ष होता है- विवाह, सन्तान और दाम्पत्य जीवन। यह वह पक्ष है जहाँ प्रेम, आत्मीयता, त्याग और संघर्ष की असली परीक्षा होती है।
5 mins
May 2026
Jyotish Sagar
नीचराशिस्थ बुध के फल
जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन (भाग-21)
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
वोट से क्रान्ति के नायक पीटर माग्यार
जन्मपत्रिका विश्लेषण
9 mins
May 2026
Translate
Change font size

