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शनि के नकारात्मक प्रभाव और निवारण के उपाय
Jyotish Sagar
|June 2023
शनि के जन्मपत्रिका में नीच राशि में होने पर अथवा शनि की ढय्या अथवा साढ़ेसाती में शरीर में विशेषकर निचले हिस्से में (कमर से नीचे), हड्डी अथवा स्नायुतन्त्र से सम्बन्धित रोग हो जाते हैं।
शनि की गति धीमी होती है। इसके दूषित होने पर अच्छे से अच्छे काम में गतिहीनता आ जाती है। जन्मपत्रिका में शनि के अशुभ प्रभाव में होने पर मकान अथवा मकान का हिस्सा गिर या क्षतिग्रस्त हो जाता है। अंगों के बाल झड़ जाते हैं। शनिदेव की भी दो राशियाँ है, मकर और कुम्भ।
शनि के जन्मपत्रिका में नीच राशि में होने पर अथवा शनि की ढय्या अथवा साढ़ेसाती में शरीर में विशेषकर निचले हिस्से में (कमर से नीचे), हड्डी अथवा स्नायुतन्त्र से सम्बन्धित रोग हो जाते हैं। वाहन से हानि अथवा क्षति होती है। सम्पत्ति का नाश हो जाता है। अचानक आग लग सकती है अथवा दुर्घटना होने की आशंका रहती है। इसलिए शनि की साढ़ेसाती अथवा ढय्या से बचाव हेतु कुछ उपाय दिए जा रहे हैं, जिन्हें करने से व्यक्ति को राहत मिलती है।
शनि की साढ़ेसाती अथवा ढय्या के समय जातक को हनूमत् आराधना करना, हनूमान् जी को चोला अर्पित करना, हनूमान् मन्दिर में ध्वजा करना, बन्दरों को चने खिलाना, हनूमान् चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, सुन्दरकाण्ड का पाठ और ॐ
This story is from the June 2023 edition of Jyotish Sagar.
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