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मेरी लाठी मेरे सिर पर ही बरसी
Jyotish Sagar
|May 2023
सफल होने पर मनुष्य की मेहनत जिम्मेदार होती है और असफल होने पर वह भाग्य को जिम्मेदार मानता है जबकि भाग्य कर्म का ही परिणाम है।
भाग्य का खेल मनुष्य पर सदैव भारी पड़ता रहा है। जब भी मनुष्य यह सोचता है कि उसने भाग्य को जीत लिया है, तभी कुछ ऐसा घटित होता है कि मनुष्य फिर भाग्य के सामने स्वयं को बौना मानने लगता है।
यानि जब मनुष्य सब प्राप्त कर लेता है, सब उसके मन के अनुरूप हो जाता है, धन और यश उस पर बरस रहा होता है, तब वह स्वयं को भाग्य से बड़ा मानने लगता है। वह यह तक कहता दिखाई देता है कि भाग्य कमजोर लोगों के लिए एक कमजोर शब्द है। भाग्य की आड़ में वे अपने निकम्मेपन को छिपाते हैं, लेकिन अनुसंधान करने पर पता चलता है कि मनुष्य में मूर्खता बहुत होती है, क्योंकि सफल होने पर उसकी मेहनत जिम्मेदार होती है और असफल होने पर वह भाग्य को जिम्मेदार मानता है जबकि भाग्य कर्म का ही परिणाम है। और जिस कर्म का फल मिल रहा होता है, वह जरूरी नहीं कि वर्तमान कर्मों का फल हो, आपके पिछले जन्मों का भी परिणाम हो सकता है।
This story is from the May 2023 edition of Jyotish Sagar.
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