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ऊजाप्रदायक दुर्गापूजा!
Jyotish Sagar
|March 2023
इसके विधिविधान से अनुष्ठान करने से लौकिक एवं पारलौकिक सिद्धियाँ मिलती हैं। इसके स्वाध्याय से मनमस्तिष्क ऊर्जावान् होते हैं। इसके बीजमन्त्रों में 'ऐं, क्लीं, हीं, श्रीँ अक्षर आवश्यक हैं। प्रकृति की त्रिगुणात्मक शक्ति (सत, रज और तम) 'दुर्गा' में समाहित हैं। दुर्गा की आराधना से मूलाधार चक्र को शक्ति प्राप्त होती है।
शक्ति की प्रतीक दुर्गा की पूजा-आराधना भारत ही नहीं, वरन् सम्पूर्ण विश्व श में आदिकाल से चली आ रही है। ऊर्जा चेतना शक्ति का ही दूसरा रूप है। प्रकृति का चेतना स्वरूप ही आद्याशक्ति है, जो परम ब्रह्म परमात्मा की सहचरी है। जिस प्रकार संसार की सृष्टि, स्थिति एवं संहार के लिए ब्रह्मा, विष्णु, महेश स्वरूप होते हैं, तो उनकी शक्ति भी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती के रूप में अवतरित होती हैं। आद्याशक्ति की निष्ठापूर्वक उपासना करने वाले शक्ति को विविध रूपों में देखते हैं। महालक्ष्मी, महासरस्वती, महाकाली, गौरी, उमा, दुर्गा, शाकम्भरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, कात्यायिनी, मातंगी, कामरूपा आदि नामों से शक्ति की साधना करते हैं। आद्याशक्ति का सर्वाधिक प्रचलित नाम 'दुर्गा' है।
This story is from the March 2023 edition of Jyotish Sagar.
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