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माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस है बसन्त पंचमी

Jyotish Sagar

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January 2023

माँ! तुम ज्ञान देने वाली हो, जब चारों ओर संशय है, तो फिर हम कहाँ जाएँ? तुम्हारी छवि का ध्यान ही हमारी अज्ञानता को दूर कर देता है। शारदे ! हम एक दीप जलाते हैं और बस, इतना जानते हैं कि कहीं कोई लयबद्ध सितार बज रहा हो, तो वह भी आपकी ही उपासना है।

- डॉ. हनुमान प्रसाद उत्तम

माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस है बसन्त पंचमी

मुनीश्वरी! मनुष्यों, दैत्यों, देवताओं के द्वारा आप की स्तुति की गई है। हजार मुख वाले शेषनाग, पाँच मुख वाले शिव और चार मुख वाले ब्रह्मा भी आपकी स्तुति करते हुए जड़वत् से हो जाते हैं। तब मैं साधारण-सा मनुष्य एक मुख से आपकी स्तुति कैसे करूँ?

कहते-कहते महर्षि याज्ञवल्क्य रो पड़े थे। गुरु शाप से विद्या छिन गई थी। महामाया ने उन्हें दर्शन देकर कहा, तुम महान् कवीन्द्र हो जाओ। ऐसा कहकर वह बैकुण्ठ चली गईं।

यह कथा आदिग्रन्थों में कही गई है। कहा यह भी जाता है कि शेषनाग ने ज्ञान के एक रहस्य को जानने के लिए सरस्वती की स्तुति की। इसके बाद ही वह भ्रम का नाश करने वाले पवित्र सिद्धान्त का विवेचन कर सके। उनकी महिमा को जानकर ही व्यास जी ने पुष्कर में 100 वर्ष तक उनकी आराधना की।

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