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केरल: वामपंथी दुर्ग में सेंध का मतलब

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January 2026

केरल के स्थानीय निकाय चुनाव परिणामों ने वामपंथियों के अंतिम गढ़ में खतरे की घंटी बजा दी है।

- केए शाजी

केरल: वामपंथी दुर्ग में सेंध का मतलब

वामपंथ की ज़मीन खिसक रही है। बीजेपी ने अपने लगभग पांच दशको के इतिहास में पहली बार राजधानी पर कब्ज़ा जमा लिया है और 101 नगर निगम वार्डों में से 50 में जीत हासिल की है। केरल में अब हिंदू एकजुट हो रहे और मुसलमानों का वामपंथी पार्टी से मोह भंग हो रहा है। सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी कांड ने भी सरकार को खासा बदनाम किया। वामपंथ के लिए यह हार केवल चुनावी झटका नहीं थी, बल्कि यह उसके काफी लंबे समय से चले आ रहे शहरी गढ़ का प्रतीकात्मक पतन है। 'दस्तक टाइम्स' के लिए केरल में हिंदू अखबार के संवाददाता रहे केए शाजी की रिपोर्ट।

केरल में चेरथला दक्षिण के एक वार्ड कार्यालय के बाहर जमा छोट सी भीड़ किसी चुनावी सभा जैसी नहीं लग रही है। न झंडे हैं न नारे, न ही पार्टी के स्वयंसेवक उत्साह बढ़ाने के लिए कोई मंच तैयार कर रहे हैं। लोग बारिश की यादों से भरी छतरियों के नीचे खड़े हैं, कुछ लोग परिसर की दीवारों से टिके हुए हैं, और धीमी, सधी हुई आवाज़ में बातें कर रहे हैं, जो आमतौर पर निजी मामलों के लिए ही होती हैं। इन चर्चाओं के केंद्र में पीएस अनीता मैरी खड़ी हैं, जो जितना बोल रही हैं, उतना ही सुन भी रही हैं।

उनसे पूछे गए सवाल चुनावी माहौल से बिल्कुल अलग हैं। आपने वह सरकारी नौकरी क्यों छोड़ी जिसके लिए इतने लोग तरसते हैं ? क्या होता है जब कोई संस्था अपने ही खिलाफ हो जाती है? क्या स्थानीय स्तर पर सत्ता बिना डर के कायम रह सकती है? यह सवाल विकास के वादों या पार्टी की विचारधारा के बारे में नहीं थे। यह सवाल गरिमा, संवेदनशीलता और असहमति की कीमत के बारे में थे।

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