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धामी के कंधों पर उत्तराखंड का मिथक तोड़ने की चुनौती

DASTAKTIMES

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April 2024

प्रदेश की धामी सरकार ने पिछले दो साल में कई अभूतपूर्व कार्य किए हैं। इसमें सबसे पहले आता है समान नागरिक संहिता कानून जो लागू होने जा रहा है। बताते चलें कि यूसीसी से महिला सशक्त होगी, उनकी सुरक्षा होगी, बच्चों की सुरक्षा होगी, लिव इन रिलेशनशिप का भी ध्यान रखा गया है। इसके बाद दूसरा नंबर आता है नकल रोकने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून भी राज्य सरकार लेकर आयी है।

- गोपाल सिंह पोखरिया

धामी के कंधों पर उत्तराखंड का मिथक तोड़ने की चुनौती

क्या उत्तराखंड में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव जिस प्रकार से मिथक टूटा, उसी तर्ज पर एक बार फिर उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव 2021 में भी मिथक टूटेगा, इसे लेकर इन दिनों हर चौक चौराहे में चर्चाएं सुनी जा सकती हैं। उत्तराखंड की धामी सरकार के पहले दो वर्ष के कार्यकाल पर नजर दौड़ाएं तो लगता है कि एक बार फिर उत्तराखंड में मिथक टूटेगा। राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में यह पांचवां लोकसभा चुनाव हो रहा है। उत्तराखंड का चुनावी इतिहास कई अनूठे रंगों और मिथकों को समेटे हुए है। इनमें एक मिथक 2019 के लोकसभा चुनाव में टूटा था। 2014 के लोस चुनाव तक यह धारणा बन गई थी कि राज्य में ज दल की सरकार होगी, उसका संसदीय चुनाव में बेड़ा पार नहीं हो सकता । 2019 के लोस चुनाव में भाजपा ने इस मिथक को तोड़ा। अब 2024 'चुनाव में एक बार फिर सियासी हलकों में सवाल तैर रहा है कि यह मिथक फिर टूटेगा या बरकरार रहेगा। प्रदेश में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है और अबकी बार इस मिथक को तोड़ने का दारोमदार उन्हीं के कंधों पर है।

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