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सच्चे कृष्ण भक्त महर्षि सुपंच सुदर्शन

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August 2025

'शिवलिंग सहस्त्राणि, शालिग्राम शतानि च। द्वादश कोटि विप्राणाम्, एकः सुदर्शन वैष्णवः ।।'भारत संतों और महर्षियों का तपोवन है। नारद, वेदव्यास, वाल्मीकि, तुलसीदास, रविदास, नानक, सुखदेव आदि महर्षियों की अमृतमयीवाणी और विलक्षण प्रतिभा से यह पृथ्वी धन्य है।

सच्चे कृष्ण भक्त महर्षि सुपंच सुदर्शन

महर्षि सुपंच सुदर्शन जी द्वापर युग के 3290 ईसा पूर्व के सर्वश्रेष्ठ सत्य स्वरुप कृष्ण भक्त, साहित्य प्रेमी, विवेक युक्त सन्त स्वरूप के अवतार महाभारत काल के ये वैष्णव भक्त थे। वे अपने समय के तेजस्वी, ज्ञानी, योग और ब्रह्मज्ञान विभूषित सन्त थे। फाल्गुन कृष्ण की त्रयोदशी को काशीनगर में आप एक सुसंपन्न परिवार में पैदा हुए थे। उनकी शिक्षा सन्त श्री करुणामय आचार्य जी के निर्देशन में हुई। आपके पिता का नाम नरहरि और माता का नाम लक्ष्मी देवी था। उनका वास्तविक नाम श्री सुदर्शन जी था। वह बचपन से ही भक्तिभाव तथा सत्य की खोज में लीन रहते थे। इसलिए कहा गया है कि-

वाल्मीकि, व्यास की तपोभूमि में वह सुंदर। द्वापर युग अवतरित हुए सन्त सुदर्शन रतन अमर ।।

भक्तिभाव स्वधर्म कर्म से तिल भर न कभी हटने वाले। गुरु दीक्षा के मूल मंत्र को जीवन भर रटने वाले ।।

महर्षि सुदर्शन जी में उत्तर प्रदेश के ही नहीं वरन् बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब आदि प्रदेशों में करोड़ों लोग अपनी आस्था रखते हैं। जिन्हें लोग भिन्न-भिन्न नामों से जैसे-धानुक, धनक, धिरकार, डोम, डुमार, धनकड़, हेला, बहेलिया, महार, जुआठा, पिजड़हा, वाजगी आदि नामों से पुकारा जाता है। इसी भांति धानुक समाज के आदिगुरु महर्षि सन्त सुदर्शन जी को भी सुपंच सूपा, सपूत स्वपंथ आदि जैसे नामों से जाना जाता है।

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