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बढ़ती उम्र में सर्द-गर्म है जानलेवा

Sadhana Path

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April 2025

मौसम में बदलाव आने से कई तरह की शारीरिक समस्या बढ़ जाती है। विशेषकर महिलाओं को इस समय स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ज्यादा होती हैं क्योंकि वे अपने बारे में कम सोचती हैं। इन सभी परेशानियों का एक ही निदान है कि आप कुछ बातों का ध्यान रखें

- रजनी अरोड़ा

बढ़ती उम्र में सर्द-गर्म है जानलेवा

अक्सर मौसम के बदलाव के लिए हम तैयार नहीं होते, जिसकी वजह से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वातावरण में मौजूद वायरस, फंगस और बैक्टीरिया से इंफेक्शन या एलर्जी का खतरा रहता है। रक्तवाहिनियों के संकुचन से रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है, साथ हृदय गति भी अनियमित होने लगती है। कमजोर इम्यूनिटी के कारण महिलाएं भी मौसम की मार को झेलती हैं और कई शारीरिक-मानसिक बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं।

तनाव

मौसम में अचानक बदलाव के कारण महिलाओं में चिड़चिड़ापन आ जाता है। वे तनाव का शिकार हो जाती हैं और जरूरत से ज्यादा सोचने लगती हैं, नतीजतन हॉर्मोनल डिसऑर्डर की समस्या बढ़ जाती है। इससे ब्रेन से सेरोटोनिन न्यूरोट्रांसमीटर स्टीमुलेट नहीं हो पाने के कारण उनमें निराशा, डिप्रेशन होता है। उनमें मूड स्विंग होना, बैचेनी, चिड़चिड़ापन, छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव होना, रिश्तेदारों या दोस्तों से मिलने के बजाय अकेले रहना पसंद करना जैसे व्यवहार देखने को मिलता है। वहीं मेलाटोनिन हार्मोन के ज्यादा मात्रा में रिलीज होने से नींद ज्यादा आती है, शारीरिक सक्रियता कम होना, आलस आना, सुस्त हो जाना, काम में मन न लगना, एक्टिविटीज जोन बदलना, एकाग्रता की कमी हो जाती है।

ऐसे में महिलाओं का सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30-40 मिनट के लिए सुबह की धूप लेनी चाहिए, जो शरीर में एंटी-डिप्रेसेंट दवाई का काम करता है और सैड डिस्ऑर्डर से बचाता है। मूड ठीक रखने के लिए उन्हें यथासंभव परिवार-दोस्तों से बातचीत बनाए रखना, सक्रिय रहना और पसंदीदा काम करने चाहिए।

शारीरिक समस्याएं

मौसम के साथ तादात्म्य बनाने के लिए शरीर को अतिरिक्त काम करना पड़ता है खासकर फेफड़ों को बाहर की हवा का तापमान शरीर के अनुकूल करना पड़ता है। ठंडी हवा अंदर लेने से फेफड़ों तक जाने वाली ब्रोंकाइल ट्यूब में सूजन आ जाती है और वो सिकुड़ जाती है, जिसके कारण फेफड़ों पर लोड पड़ता है, जिससे कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं।

वायरल इंफेक्शन

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