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आदर्श प्रेम के प्रतीक देवी-देवता

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February 2025

यूं तो हर इंसान का प्रेम अपने आप में सम्पूर्ण व अनुकरणीय होता है परन्तु कुछ लोगों का प्रेम इतिहास के पन्नों पर सदा के लिए स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो जाता है। आइये नमन करें कुछ ऐसे ही प्रेम के प्रतीकों को।

- प्राची प्रवीन महेश्वरी

आदर्श प्रेम के प्रतीक देवी-देवता

प्रेम सृष्टि की वो अनमोल कृति है जिससे हर सुख का उदय होता है प्रेम वो अद्वितीय थाती है जो जीवन को सार्थक रूप प्रदान करती है। एक आदर्श प्रस्तुत करने का सौभाग्य देती है।

शिव और गौरी

शिव गौरी यानी अर्धनारीश्वर, जिन्होंने यह सिद्ध किया की पत्नी पति दोनों एक आत्मा दो शरीर होते हैं। शिव और गौरी का संबंध जन्म-जन्मान्तर का है क्योंकि गौरी ही शिव की पूर्व पत्नी सती थी। सती दक्ष प्रजापति की पुत्री थी। शिव के साथ सती का विवाह करना दक्ष को पसंद नहीं था। सती ने पिता के विरुद्ध होकर शिव से विवाह किया। एक बार राजा दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया इसमें सभी देवी-देवताओं के लिए आसन रखे गए परन्तु भगवान शिव को ना तो बुलाया और ना ही आसन रखा गया। सती पिता के बिना निमंत्रण के बाद भी यज्ञ में जा पहुंची। वहां जाकर उन्होंने पूरे यज्ञ स्थली का अवलोकन किया परन्तु कहीं भी उन्हें अपने पति शिव के लिए आसीन नहीं मिला। इस स्थिति को देख सती क्रोध से कांप उठीं और पति के अपमान का बदला लेने के लिए पिता के आयोजन को विफल करने हेतु विशाल दहकते हवन कुंड में कूद गईं। जब शिव को ये पता चला तो वह यक्षस्थली पर आये और उन्होंने राजा दक्ष का सर धड़ से अलग कर दिया, और सती के अधजले शरीर को कंधे पर डालकर घूमते रहे। जहां-जहां सती के जले अंग गिरे वहांवहां शक्तिपीठ बन गए। यद्यपि सती का शरीर जल कर खत्म हो चुका था परन्तु उनकी आत्मा में अभी भी शिव का ही वास था।

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