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ज्योतिर्लिंग, रावणेश्वर महादेव

Sadhana Path

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December 2024

शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है पूर्वी भारत में देवधर के 'रावणेश्वर महादेव'। उनके देवधर में आवास की कथा बेहद रोचक और अद्भुत है। लंकापति रावण की मां शिवभक्त थी।

- हनुमान प्रसाद उत्तम

ज्योतिर्लिंग, रावणेश्वर महादेव

एक बार वो मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पूजा कर रही थीं। शिव की स्तुति करके उन्होंने जलाभिषेक के लिए जैसे ही लिंग पर पानी डाला, वह घुल गया। तब रावण ने विचार किया कि यदि वह शिव को लंका में रहने के लिए राजी कर ले तो उसकी मां को शिव के नाशवान प्रतीक रूप की पूजा नहीं करनी पड़ेगी। वह साक्षात शिव की पूजा करने लगेंगी।

अपने नेक विचार को कार्य रूप देने के लिए रावण कैलाश पर्वत गया और वहां तपस्या करने लगा। शिव खुश हुए, तो उसने शिव से लंका में रहने का अनुरोध किया। शिव ने लंका में रहने की बात नहीं मानी, पर सांत्वना के तौर पर अपने बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक उसे दे दिया। इस शर्त के साथ कि वह लंका जाते हुए रास्ते में ठहर कर ज्योतिर्लिंग को कहीं जमीन पर न रखे अन्यथा लिंग वहीं अचल होकर रह जाएगा।

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