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सीधी धान (DSR) की खेती की विधि किसानों के लिए वरदान या अभिशाप !

Modern Kheti - Hindi

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15th July 2025

भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहां की जलवायु में विभिन्न प्रकार की फसलें बड़ी सुगमता से उगाई जाती हैं। इन फसलों में धान बहुत महत्वपूर्ण एवं प्रमुख खाद्यान्न फसल है, जो पूरे विश्व की विशाल जनसंख्या का प्रमुख आहार है।

- व्योमेंद्र कुमार सिंह, ऋषभ चौहान, डॉ. कृष्णपाल, डॉ. राघवेन्द्र सिंह, शेख शरीफ (1. शोधछात्र, आई.एफ.टी.एम विश्वविद्यालय, मुरादाबाद) (2. सा. प्राध्यापक, मदरहुड विश्वविद्यालय, रुड़की) (3. प्राध्यापक, मदरहुड विश्वविद्यालय, रुड़की) (4. सा. प्राध्यापक, शस्य विज्ञान, जी.डी. गोयंका यूनिवर्सिटी, सोहना हरियाणा) (5. सा. प्राध्यापक, शस्य विज्ञान, गोदावरी ग्लोबल यूनिवर्सिटी, राजमहेंद्रवरम, आंध्रप्रदेश)

सीधी धान (DSR) की खेती की विधि किसानों के लिए वरदान या अभिशाप !

धान न केवल भारतीय जनजीवन की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, बल्कि यह देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

धान की खेती मुख्यतः खरीफ ऋतु में की जाती है और यह एक ऐसी फसल है जिसे उगाने के लिए अधिक जल की आवश्यकता होती है। यह फसल गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी होती है और धान की खेती भारत के लगभग सभी राज्यों में की जाती है, विशेषकर पूर्वी भारत, जैसे कि पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तरप्रदेश, ओडिशा और असम आदि में बड़े पैमाने पर की जाती है। आंध्राप्रदेश को "भारत का चावल का कटोरा" के रूप में जाना जाता है। आज के समय में जब जलवायु परिवर्तन, जल संकट और भूमि की उर्वरता में कमी जैसे अनेक कृषि संबंधी चुनौतियां सामने हैं, ऐसे में धान की उन्नत खेती पद्धतियां, जैसे एस.आर.आई (System of Rice Intensification), जैविक खेती, और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM), DSR (Direct Seeded Rice) धान की उत्पादकता को टिकाऊ और लाभकारी बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।

हम बात करेंगे DSR विधि से धान बोने की प्रक्रिया व उससे होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में।

DSR विधि से धान उगने की विधि :

1. प्रजाति चयन : DSR विधि से धान रोपने में सबसे पहले प्रजाति चयन मुख्य कार्य है क्योंकि इसमें पानी कम दिया जाता है जिससे कि फसल में खरपतवार, कीट का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए हमें ऐसी प्रजाति चुननी चाहिए। जो कम अवधि वाली हो, जिनकी अंकुरण क्षमता अच्छी हो।

उदाहरण : PR 126, PR 121, IR 64, Pusa 1121

2. भूमि की तैयारी : समतल और जल निकासी युक्त खेत नहीं होगा तो अत्याधिक वर्षा के कारण पानी भर जाएगा और फसल बर्बाद हो जाएगी, लेजर लेवलिंग व हल्की जुताई आवश्यक।

3.

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