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शहद के लिए हजारों किमी. उड़ती हैं मधुमक्ख्यिां
Modern Kheti - Hindi
|15th May 2025
हिमाचल प्रदेश के ऊना शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर नगनौली गांव के सुनसान जंगल में मजदूरों का झुंड टेंट लगाए हुए है। वे लोग यहां फैले बक्सों की देखभाल कर रहे हैं। इन बक्सों में मधुमक्खियां बंद हैं।
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दरअसल ये मजूदर मधुमक्खी पालने का काम करते हैं। इन बक्सों को कॉलोनी कहा जाता है और जिस जगह ये मजदूर काम करते हैं, उसे एक फार्म कहा जाता है, जो किसी खेत जैसा नहीं है, बल्कि जंगल के बीच की खाली जगह है। जहां लगभग 250 कॉलोनियां (बक्से) बिछी हुई हैं। इस फार्म के मालिक हैं अरुण चौधरी। अरुण चौधरी के ऐसे चार फार्म यहां आसपास के जंगल में हैं। मजदूर यहां से रोजाना दो से तीन बाल्टियां (20 किलोग्राम की एक बाल्टी शहद) निकाल लेते हैं। इस जंगल में इन दिनों शीशम, कड़ी पत्ता, तुलसी, नीम, सफेद फूल, फ्लाई, ब्लैकेंट आदि पर फूल आ रहे हैं। मधुमक्खियां जंगल में लगे फूलों का रस चूसकर लाती और अपनी कॉलोनियों में लौटती। बाद में मजदूर यहां से शहद निकालकर बाल्टियों में भर देते हैं। शाम ढलते-ढलते मजदूर इन बक्सों को अच्छे से बंद कर देते हैं। इन मजदूरों में शामिल सुधीर बिहार के रहने वाले हैं और लगभग आठ साल से मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं। वह आठ साल पहले काम के सिलसिले में ऊना आए थे। उन्होंने मधुमक्खी पालन का काम सीखा और अब वह पूरी तरह प्रशिक्षित
This story is from the 15th May 2025 edition of Modern Kheti - Hindi.
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