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कितनी कारगर होंगी कृषि और ग्रामीण विकास की योजनाएं ?
Modern Kheti - Hindi
|15th April 2025
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण की शुरुआत चार 'शक्तिशाली' विकास इंजनों की पहचान से की, जिनमें पहला कृषि है। यह लंबे समय से ध्यान दिया जाने वाला अपेक्षित विषय है।
कृषि क्षेत्र के लिए प्रमुख घोषणाओं में 'धन-धान्य कृषि योजना' नामक एक नई प्रमुख योजना शामिल है, जिसे देश के 100 जिलों में लागू किया जाएगा। ये जिले 'कम उत्पादकता, मध्यम फसल इंटेंसिटी और औसत से नीचे के ऋण मानकों' वाले होंगे। इस योजना का उद्देश्य है: 1) कृषि उत्पादकता बढ़ाना, 2) फसल विविधीकरण और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना, 3) पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण को बढ़ावा देना, 4) सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना और 5) दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता आसान बनाना। इस योजना में चुने गए 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को कवर किए जाने की 'संभावना' है। तो क्या इसका मतलब यह है कि ये 100 जिले पहले ही चुने जा चुके हैं?
मैं बुरी खबर से शुरुआत करता हूं। इस नई योजना के लिए बजट में कोई विशिष्ट धन आवंटित नहीं किया गया है! बजट में कोई 'धन' नहीं, लेकिन यह योजना 1.7 करोड़ किसानों का 'धन' बढ़ाएगी और अधिक 'धान्य' भी पैदा करेगी। यह थोड़ा रहस्यमय लगता है! सबसे उदार व्याख्या यही हो सकती है कि धन कृषि मंत्रालय की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (एनएमएसए) जैसी मौजूदा योजनाओं से आएगा, तो क्या यह योजना कई स्रोतों से वित्तपोषित होगी, जो संभवतः
मिशन मोड में समन्वित होकर इन 100 जिलों में कार्यान्वित की जाएगी ? देखते हैं कि यह कैसे आगे बढ़ती है। ऐसा प्रयास नौकरशाही की उलझनों में फंस सकता है! यह मानते हुए कि यह योजना 100 जिलों में विकास का एक शक्तिशाली इंजन बनेगी और इसके लिए धन की कमी नहीं होगी, आईए आगे के एक संभावित रास्ते पर विचार करें।
यह योजना मुख्य रूप से 2007 में शुरू किए गए सफल 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन' के सिद्धांतों पर आधारित प्रतीत होती है। इस मिशन का लक्ष्य उन पिछड़े जिलों पर केंद्रित था, जहां खाद्यान्न (मुख्य रूप से चावल और गेहूं) की अधिक उत्पादकता की संभावना थी। इस योजना को 5 वर्षों में 5000 करोड़ रुपये की निधि मिली थी। संक्षेप में कहें तो मिशन के तहत लागू लक्षित कदमों के कारण खाद्यान्न उत्पादन में 3.4 करोड़ टन की वृद्धि हुई, जबकि लक्ष्य दो करोड़ टन का था। यह 4500 करोड़ रुपये की लागत से हासिल किया गया, जो निर्धारित बजट से 500 करोड़ रुपये कम था।
This story is from the 15th April 2025 edition of Modern Kheti - Hindi.
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