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बदलते परिवेश में लाभदायक धान की सीधी बिजाई
Modern Kheti - Hindi
|15th June 2024
धान भारत की एक प्रमुख फसल है। हमारे देश में लगभग 360 लाख हैक्टेयेर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है जिसमें से लगभग 20 लाख हैक्टेयर क्षेत्र वर्षा आधारित है। असिंचित क्षेत्रों में समय पर वर्षा का पानी न मिलने से किसान लोग समय से कद्दू नहीं कर पाते हैं जिससे धान की रोपाई में विलम्ब हो जाती है।
इसके साथ-साथ सिंचित नहरी क्षेत्रों में भी नहर का पानी समय पर नहीं आने से धान की रोपाई विलम्ब से होती है। इसके अलावा समय पर मजदूर न मिलने के कारण भी धान की रोपाई में देरी होती है और आने वाले समय में कोरोना महामारी के कारण मजदूरों की कमी की समस्या और ज्यादा बढ़ने की सम्भावना है। इन सबके कारण पैदावर में कमी के साथ-साथ रबी फसल जैसे गेहूँ की बुवाई में देरी हो जाती है, फलतः रबी फसल की उपज भी घट जाती है। इस समस्या का धान की सीधी बुवाई/बिजाई ही एक सही विकल्प है। सीधे बुआई/बिजाई (ठस्त्र) का मतलब धान फसल को बिना कद्दू की हुई जमीन में सीधे बीजना है। इसको डायरेक्ट सीड राईस (ष्ठस्क्र) या धान की सीधी बिजाई/बुआई का नाम दिया जाता है। आज के परिवेश में चावल में संसाधन संरक्षण तकनीकी पर आधारित सीधे बुआई/बिजाई (ष्ठस्त्र) गंगा के मैदानी क्षेत्र जो कि पंजाब से लेकर कोलकत्ता तक फैला हुआ है, में वृहत पैमाने पर अपनाई जानी चाहिए क्योंकि धान में सीधी बुआई से कई महत्वपूर्ण फायदे क्षेत्र स्तर पर होते हैं जैसे समय पर धान की बुवाई हो जाती एवं लागत कम हो जाती है। पराम्परागत तरीके से नर्सरी उगाने, कद्दू करना (Puddling/पडलिंग) तथा रोपनी (Transplanting/ट्रांसप्लाटिंग) करने पर धान की खेती में लागत बढ़ ज
This story is from the 15th June 2024 edition of Modern Kheti - Hindi.
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