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एक महान उद्देश्य ने खोल दिये कल्याण के अनेक मार्ग
Rishi Prasad Hindi
|May 2022
अपने हृदय में धर्म के प्रति जितनी सच्चाई है उतनी ही अपनी उन्नति होती है।
-
श्री योगवासिष्ठ महारामायण (वैराग्य प्रकरण : ७.२०) में श्री विश्वामित्रजी कहते हैं :
नह्यस्मदादयः प्राज्ञाः सन्दिग्धे सम्प्रवृत्तयः ।।
This story is from the May 2022 edition of Rishi Prasad Hindi.
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