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धन्यवाद, छिपकली !

Aha Zindagi

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August 2025

क्या एक ऐसा जीव जो चुपचाप हमारे लिए काम करता है, केवल अज्ञान और डर की वजह से हमारी घृणा का पात्र बनना चाहिए?

- - अभ्युदय केलकर, पर्यावरणविद्

धन्यवाद, छिपकली !

  • हम छिपकली को जितना पहचानते हैं, उससे कहीं ज़्यादा उसे ग़लत समझते हैं।

हमारे घरों में छिपकली की मौन उपस्थिति, पर्यावरणीय दृष्टि से एक बेहद अहम भूमिका निभाती है। छिपकली हमारे आसपास रहते हुए कीटों से हमारी रक्षा करती है और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन भी बनाए रखती है।

कुछ रंग बदलती हैं, कुछ तैरती हैं

'छिपकली' शब्द सुनते ही आमतौर पर ज़ेहन में घरेलू दीवारों पर रेंगती गीको (gecko) की छवि उभरती है। लेकिन वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो छिपकलियां स्कुआमाटा (Squamata) नामक गण की सदस्य होती हैं, जिसमें सांप भी शामिल हैं। यह सुनकर चौंकना स्वाभाविक है, लेकिन सच यह है कि सांप, छिपकलियों से ही विकसित हुए हैं। लाखों वर्षों के विकास क्रम में उनके पैर ग़ायब हो गए, लेकिन डीएनए और जैविक संरचना में वे अब भी रिश्तेदार ही हैं। छिपकलियों की 7,000 से अधिक ज्ञात प्रजातियां हैं जिनमें से कुछ रंग बदलने वाली हैं (कैमेलियन), कुछ पेड़ों पर रहती हैं, कुछ ज़मीन पर तेज़ दौड़ती हैं, और कुछ तो समुद्र में तैरती भी हैं। सबसे बड़ी छिपकली कोमोडो ड्रैगन है, जो लगभग 90 किलो की होती है, और सबसे छोटी ब्रूकेशिया नाना, जिसकी लंबाई मात्र 1.5 सेंटीमीटर होती है।

गिरगिट, गीको, गोह सब छिपकलियां हैं

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