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क्यों हो रहे हैं लोग आपे से बाहर
Sadhana Path
|July 2025
गुस्सा भावनाओं को प्रकट करने का माध्यम है। गुस्सा आना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन कई बार ये गुस्सा इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति आवेग में सामने वाले को नुकसान पहुंचा सकता है। गुस्सा अपनी बात मनवाने का नहीं बल्कि दूसरे के प्रति अपनी नाराजगी प्रदर्शित करने का माध्यम है। आप इसे उसी तरह लें।
दिल्ली में 19 वर्षीय निखिल की हत्या उसके साथ पढ़ने वाले कुछ लड़कों ने ही कर दी। निखिल का दोष केवल इतना था कि वह अपनी महिला मित्र को परेशान करने का विरोध कर रहा था। यह कहानी केवल निखिल की ही नहीं हैं। अभी हाल में कई ऐसे मामले आए हैं जिनमें छोटी-छोटी बातों पर लोग अपना आपा खो जाते हैं। यूपी के चंदौली में एक महिला ने केवल इसलिए फांसी लगा ली कि उसके पति ने उसे सबके सामने थप्पड़ मार दिया। ये थप्पड़ केवल इसलिए मारा गया था कि उसने डीजे पर डांस करने से मना कर दिया था। ये केवल दो लोगों की कहानी नहीं है, आपको अखबार या सोशल मीडिया में कई ऐसी कहानियां पढ़ने को रोज मिलती होंगी। आजकल के लोगों में सहनशीलता की बेहद कमी आ गई है।
अकसर आपने मेट्रो, बस या सड़क पर देखा होगा कि लोग हल्का-सा धक्का लगने पर ही ऐसे लड़ने लगते हैं जैसे कि सामने वाले ने उनके गाल पर थप्पड़ जड़ दिया हो।
दुनिया में जितने लोग हैं सबका स्वभाव एक समान नहीं होता है किसी को छोटी- छोटी बातों पर गुस्सा आता है और खत्म हो जाता है वहीं कुछ लोग अपना गुस्सा दबा कर रखते हैं और जब एक दिन उनका गुस्सा उफान पर चढ़ता है तो वह या तो अपने किसी करीबी या अपने साथ कोई बड़ा नुकसान कर लेते हैं।
अगर आप घर से बाहर निकल रहे हैं तो शांत रहें क्योंकि बाहर वाले को आपको व्यवहार के बारे में पता नहीं है। केवल घर के लोग ही आपके गुस्से को बर्दाश्त कर सकते हैं क्योंकि वह आप को अच्छी तरह से जानते हैं। छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करके आगे बढ़ने में ही भलाई है। ये काम मुश्किल है लेकिन धीरे-धीरे आप इसे अपनी आदत में शुमार कर लेंगे तो आपको दिक्कत नहीं होगी।
मनोचिकित्सक मानते हैं कि शहरी लोगों में अत्यधिक गुस्सा उनके खराब लाइफस्टाइल की वजह से है। बढ़ती जनसंख्या के कारण सड़कों पर भीड़ ज्यादा हो गई है। सड़क पर एक से दो घंटे तक जाम में फंसे रहने के कारण लोग अपने जरूरी काम के लिए लेट हो जाते हैं। जिस वजह से भी उन्हें गुस्सा अधिक आता है।
Dit verhaal komt uit de July 2025-editie van Sadhana Path.
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