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स्वामी सहजानन्द सरस्वती- किसानों को भगवान माननेवाला संन्यासी

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February 2020

स्वामी सहजानन्द सरस्वती का जन्म उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले के देवा गांव में 22 फरवरी 1889 को महाशिवरात्रि के दिन हुआ था। चूंकि बचपन में ही उनकी माताजी का स्वर्गवास हो गया था, इसलिए पढ़ाई के दौरान ही उनका मन अध्यात्म में रमने लगा। फिर वह क्षण भी आया जब गुरु दीक्षा को लेकर उनके बाल सुलभ मन में धर्म की कतिपय विकृति के रिवलाफ आंतरिक विद्रोह पनपा।

- गोपाल जी राय

स्वामी सहजानन्द सरस्वती- किसानों को भगवान माननेवाला संन्यासी

सनातन धर्म के अंधानुकरण के खिलाफ सहजानंद जी के मन में जो भावना पली बढ़ी थी, उसने सनातनी मूल्यों के प्रति उनकी आस्था को और गहरा किया । यं तो वैराग्य भावना को देखकर बाल्यावस्था में ही उनकी शादी कर दी गई । लेकिन, संयोग ऐसा रहा कि सद्गृहस्थ जीवन शुरू होने के पहले ही इनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया । इसके बाद उन्होंने विधिवत संन्यास ग्रहण की और दशनामी

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ध्यान के लिए धैर्य जरूरी है

जीवन एक कला है। वहां विपरीत को मिलाने की क्षमता होनी चाहिए। ध्यान और धैर्य दो विपरीतताएं हैं। ध्यान और धैर्य के जोड़ का अर्थ है- पाना चाहता हूं अभी रुकने को राजी हूं-सदा के लिए। इसे समझ लेना । ध्यान और धैर्य जहां मिल जाते हैं, वहां जीवन का परम संगीत बजता है, वहां सत्व की धुन गूंजती है।

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मानव की त्रयात्मक प्रकृति

सूक्ष्म प्राणी क्या हैं इसे अच्छी तरह समझने के लिए, हमें पहले यह समझना चाहिए कि हम क्या हैं।

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व्यक्तित्व का दर्पण है हस्ताक्षर

व्यक्ति के हस्ताक्षर में उसके व्यक्तित्व की सभी बातें पूर्ण रूप से दिखाई देती हैं।

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मकर संक्राति का अध्यात्मिक महत्त्व

यूं तो हम सभी के लिए त्योहारों का मतलब होता है हंसी, उल्लास और उमंग लेकिन सही मायनों में त्योहारों का महत्त्व उससे कहीं बढ़ कर और गूढ़ होता है।

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सर्दियों में भी रखें वास्तु का ख्याल

सर्दी के इस मौसम में कुछ वास्तु उपाय करके आप सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं कौन से हैं वो उपाय आइए लेख के माध्यम से जानें ?

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भारतीय संस्कृति के कई रंग दिखाती मकर संक्रांति

हिन्दू धर्म संस्कृति में वर्ष का आरंभ ही होता है मकर संक्रांति जैसे बड़े पर्व से जिसकी केंद्र में है सूर्य की आराधना। इस दिन दान और स्नान का भी विशेष महत्त्व है। आराध्य देव सूर्य काल भेद से अनेक रूप धारण करते हैं।

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चाय के कपसे जानिए अपना भविष्य

यह मुमकिन है कि हम चाय की बची हुई पत्ती द्वारा अपना भविष्य जान सकते हैं, उसके आकार और रूप की मदद से जो हमें चाय पी लेने के बाद कप में मिलते हैं।

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विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति

भारत त्योहारों का देश है, यहां प्रत्येक त्योहार को हर्ष-उल्लास के साथ मनाया जाता है। उन्हीं में से एक त्योहार है मकर संक्रांति जिसे भारत के प्रत्येक राज्य के लोग अपनी परंपरा, संस्कृति के अनुसार मनाते हैं। कैसे मनाया जाता है भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्राति का त्योहार आइए जानते हैं

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स्फूर्ति की अभिव्यक्ति

जीवन स्फूर्तिमय है।

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माधुर्य के देवता कृष्ण

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