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मिशन झारखंड - अब राजू के भरोसे कांग्रेस की नैया
DASTAKTIMES
|May 2025
झारखंड में कांग्रेस अजब हालतों में फंस गई है। कांग्रेस की मदद से झारखंड में लगातार दूसरी बार झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार बनी है। लेकिन इस राज्य में भी कांग्रेस का वही हाल हो रहा है जो कभी यूपी और बिहार में हुआ था। कांग्रेस का वोट बैंक क्षेत्रीय दलों में बंटता जा रहा है। सूबे में कांग्रेस के पतन को रोकने के लिए पार्टी हाईकमान ने आईएएस से राजनेता बने के. राजू को झारखंड की कमान सौंपी है। राजू एक्शन मोड में हैं। रांची से 'दस्तक टाइम्स' के लिए वरिष्ठ पत्रकार उदय चौहान की रिपोर्ट।
झारखंड में पिछले साल 2024 में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर अभी प्रदेश की कमान संभालेंगे और पार्टी को मजबूत बनाने का काम करेंगे। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा था क्योंकि कांग्रेस ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद जिस प्रकार प्रदेश में शीर्ष स्तर पर बदलाव किया गया उससे स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस हाईकमान के मन में कुछ और चल रहा है। गौरतलब है कि यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में कांग्रेस के साथ खेल हो चुका है। कमज़ोर होती कांग्रेस ने क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और एक दिन उसने पाया कि उस क्षेत्रीय दल ने कांग्रेस को ही निगल लिया। देखते-देखते कांग्रेस का वोट बैंक क्षेत्रीय दल का वोट बैंक हो गया। कांग्रेस के बड़े नेता इस बात को कई मंचों से कह चुके हैं कि कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक दूसरे दलों की ओर खिसक रहा है। कांग्रेस के लिए यह चिंता का विषय है। इसे देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कांग्रेस के कई नेताओं का ऐसा मानना है कि झामुमो और कांग्रेस का वोट बैंक लगभग एक ही है ऐसी स्थिति में कांग्रेस के नेता इस बात की कोशिश में लगे हैं कि किसी भी प्रकार से झारखंड में पार्टी को मजबूत करना है। कांग्रेस को अगर पार्टी का विस्तार करना है तो जमीन पर उतरकर काम करना ही होगा। पर ये करेगा कौन? कांग्रेस ने ये ज़िम्मेदारी प्रदेश प्रभारी बनाकर के. राजू को सौंपी है।
बताया जा रहा है कि के. राजू की नियुक्ति एक खास मकसद से की गई है। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो के. राजू संगठन के व्यक्ति रहे हैं। उनके पास पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करने का अच्छा खासा अनुभव है। संगठन को कैसे मजबूत किया जाए, इसकी उन्हें अच्छी समझ है। इससे पहले भी कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें जो भी टास्क दिया है उसे उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ पूरा किया है। कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के. राजू के हाथों में झारखंड की कमान सौंप कर वहां नई संभावनाओं को तलाश रहा है। पार्टी को लगता है कि जमीन पर जमीनी मुद्दों को लेकर संघर्ष किया जाय तो कोई कमाल हो सकता है। झारखंड में कांग्रेस एक बार फिर मिशन मोड में जुट गई है।
Denne historien er fra May 2025-utgaven av DASTAKTIMES.
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