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खांसी का घरेलू उपचार
Sadhana Path
|January 2024
खांसी कोई स्वतंत्र रोग नहीं, बल्कि दूसरे रोगों के कारण उत्पन्न होने वाली विकृति है। ऋतु परिवर्तन के समय प्रकृति विरुद्ध भोजन करने, अधिक शीतल पेय और खाद्य पदार्थों का सेवन करने से खांसी की उत्पत्ति होती है। तेल-मिर्च युक्त चीजें खाने व शीतल जल पी लेने से भी प्रायः खांसी हो जाती है।
लक्षण
खांसी का दौरा किसी समय भी प्रारंभ हो सकता है। कुछ खाते-पीते समय श्वास मार्ग अवरुद्ध होने पर तीव्र रूप में खांसी शुरू होती है। खांसते-खांसते रोगी परेशान हो जाता है जब तक बलगम (कफ) न निकले खांसी चलती रहती है। चेहरा लाल हो जाता है। खांसने से पेट में दर्द भी होने लगता है।
खांसी के प्रकार
सूखी व तर खांसी
सोंठ, पीपलामूल, पीपल, बहेड़ा की छाल बराबर-बराबर लेकर चूर्ण बना लें फिर शहद में मिलाकर चटाएं।
कफ की खांसी
अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटें। अगर कफ गिरता हो तो एक छुहारे की गुठली निकालकर उसमें 3 लौंग, 3 काली मिर्च भरकर अरण्ड के पत्ते में लपेटकर आग में जलाएं, फिर उसकी राख शहद में मिलाकर चाटें।
हिचकी की दवा
बकरी के दूध में सोंठ मिलाकर पिलाएं या आम के पत्ते हुक्के में रखकर पिलाएं या शहद चटाएं।
खांसी-हिचकी की दवा
काली मिर्च, अजवायन, सोंठ, कांकड़ासिंगी, पीपल, पोहकर, मूल जायफल- इन सबको बराबर-बराबर लेकर कूट-छानकर शहद में चटाएं या काली मिर्च को चूर्ण बनाकर उसमें उतनी ही मिश्री मिलाकर 2 रत्ती शहद में मिलाकर चाटें।
सांस की खांसी
तालिस पत्र 1 तोला, छोटी इलायची 1 तोला, काली मिर्च 2 तोला, सोंठ 2 तोला, तेजपत्र 2 तोला, वंशलोचन 4 तोला, नीले रंग का पीपल 4 तोला, मिश्री 1 छटांक- इन सबको बारीक पीसकर घी या मक्खन के साथ खाएं।
Denne historien er fra January 2024-utgaven av Sadhana Path.
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