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रूप, जय और यश की अधिष्ठात्री माँ दुर्गा
Jyotish Sagar
|October 2020
मान्यता है कि जिस समय मौसम परिवर्तन हो रहा हो, उस समय व्यक्ति को आहार, दिनचर्या तथा जीवन शैली को लेकर कुछ ऐसे नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि वह बदलते मौसम के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें।
चाहे वह चैत्र के नवरात्र हों (सर्दी के बाद गरमी की शुरुआत) अथवा शारदीय नवरात्र (वर्षा के बाद शीत का आगमन)। दोनों ही ऋतुओं के संधिकाल । इसलिए नवरात्र में न केवल विशेष पूजन, बल्कि व्रत, उपवास, ध्यान, पूजा आदि की ऐसी व्यवस्था की गई है कि ताकि नौ दिनों तक व्यक्ति आहार-विहार के साथ संयमित जीवन जीकर खुद को बदलते मौसम के अनुरूप बना लें।
Denne historien er fra October 2020-utgaven av Jyotish Sagar.
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