Facebook Pixel शिवकृपा प्राप्ति हेतु श्रावण मास में क्या करें? | Jyotish Sagar - religious-spiritual - इस कहानी को Magzter.com पर पढ़ें

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शिवकृपा प्राप्ति हेतु श्रावण मास में क्या करें?

Jyotish Sagar

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July 2026

Month Planner for Shravan Month

शिवकृपा प्राप्ति हेतु श्रावण मास में क्या करें?

सुप्रतीक्षित श्रावण मास इस माह की 30 तारीख से आरम्भ हो रहा है और 28 अगस्त तक रहेगा। श्रावण मास की प्रतीक्षा प्रत्येक हिंदू धर्मावलम्बी को होती है। शायद ही कोई हिंदू परिवार ऐसा होगा, जो श्रावण मास में शिव-अर्चना से वंचित रहता हो। सभी अपने-अपने तरीके से श्रावण के महीने में शिव आराधना करते हैं। कोई व्रतोपवास करता है, तो कोई शिव मन्दिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करता है। कुछ कावड़ लाकर शिव को मनाते हैं, तो कुछ रुद्राभिषेक अनुष्ठान से शिव को प्रसन्न करते हैं। कहने का आशय यह है कि प्रत्येक शिव मन्दिर में भक्तों की चहल-पहल रहती है। यहाँ तक कि छोटे-बड़े शिवधामों में मेले भी भरते हैं।

वस्तुतः भारत में शिवोपासना किसी सम्प्रदाय विशेष तक सीमित नहीं है। यह तो भारत की संस्कृति में रची-बसी है और उसका अभिन्न अंग है। यही कारण है कि श्रावण मास में कश्मीर से कन्याकुमारी और सोमनाथ से कामाख्या तक हर गाँव, कस्बे और शहर में शिव के भजन-कीर्तन गुंजायमान रहते हैं।

प्रस्तुत आलेख में श्रावण मास में शिवकृपा प्राप्ति हेतु किए जाने योग्य साधनों का संक्षिप्त वर्णन करने का प्रयास किया गया है, ताकि इस माह आप व्यवस्थित रूप से भगवान् शिव की उपासना कर सकें।

आगे बढ़ने से पहले श्रावण मास का महत्त्व समझते हैं। पुराणों में वर्णित है कि यह मास भगवान् शिव को अत्यधिक प्रिय है। मान्यता है कि इस महीने शिवोपासना करने से भोग से लेकर मुक्ति तक की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि समुद्र मन्थन के दौरान निकलने वाले कालकूट विष का जब भगवान् शिव ने लोकहित में पान कर लिया था, तब उनके शरीर में भीषण गर्मी उत्पन्न हुई। उसकी शान्ति के लिए देवताओं, ऋषि-मुनियों आदि ने उनका जलाभिषेक किया, तब से शिव पर जल अर्पित करने की परम्परा चली आ रही है। यह भी मान्यता है कि जिस प्रकार भगवान् शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को स्थान दिया हुआ है और वे निरन्तर बह रही हैं, उसी प्रकार शिवलिंग का जलाभिषेक करने से वही भाव उत्पन्न होता है, जिससे भगवान् शिव प्रसन्न होते हैं। यह भी मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान् शिव कैलास से उतरकर मैदानी क्षेत्र में आते हैं। उनकी अर्चना में इन्द्र बारिश करते हैं, तो वहीं प्रकृति भी हरियाली लाकर उनका स्वागत करती है।

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यह कहानी Jyotish Sagar के July 2026 संस्करण से ली गई है।

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