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सूक्ष्म शरीर की अदृश्य ऊर्जा!
Jyotish Sagar
|July 2026
सूक्ष्म शरीर की आकृति भी स्थूल शरीर के अनुरूप ही होती है। इसमें पंचभौतिक तत्त्व नहीं होने से इसको पोषण के लिए स्थूल पदार्थों की आवश्यकता नहीं होती है।
भारतीय दर्शन एवं अध्यात्म के अनुसार भौतिक देह के तीन प्रभाग हैं-(1) स्थूल देह, (2) सूक्ष्म देह और (3) कारण देह। इन्हें 'भूः', 'भुवः' एवं 'स्वः' भी कह सकते हैं। प्रत्यक्ष दिखाई देने वाला पार्थिव शरीर ही स्थूल शरीर है।
सूक्ष्म शरीर कैसा है? किन आध्यात्मिक तत्वों का बना हुआ है और उसमें क्या-क्या विशेषताएँ हैं? उसके चारों ओर फैला हुआ आभामण्डल कैसा है? आदि विषयों पर विद्वानों के भिन्न-भिन्न मत हैं। विश्व के सभी धर्मों और सम्प्रदाय सूक्ष्म शरीर के अस्तित्व पर विश्वास करते हैं। अंग्रेजी में सूक्ष्म शरीर को 'Astral Body' कहते हैं। मृत्यु के उपरान्त पुनर्जन्म होने से पूर्व तक आत्मा जिस शरीर को धारण किए रहती है, वह सूक्ष्म शरीर कहलाता है।
प्राचीन वाङ्मय में सूक्ष्म शरीर
पुराण ग्रन्थों मुख्यतः गरुड़ पुराण में इसे 'आतिवाहिक देह' कहा गया है। दृष्टिगत स्थूल शरीर से सूक्ष्म शरीर लिपटा रहता है। आचार्य श्री निम्बार्काचार्य जी ने लिखा है- उक्त लक्षणप्राणादिमाञ्जीवो हि सूक्ष्म भूत-सम परिष्वत एवं देहं विहाय देहान्तरं गच्छति।।
- ब्रह्मसूत्र 3-1-1
अर्थात् जीवात्मा जब अपने पूर्व स्थूल शरीर को छोड़कर दूसरे स्थूल शरीर में प्रवेश करती है, तब सूक्ष्म शरीर के साथ ही निकल जाती है। सूक्ष्म शरीर अनुभूति प्रधान होता है।
परामनोविज्ञान के अनुसार सूक्ष्म शरीर की कुछ अज्ञात तरंगें अन्य जीवित व्यक्ति के मस्तिष्क पर भी प्रभाव डालकर अपना अस्तित्व प्रकट करती है। जैसा वह चाहे, वैसा कृत्य पूरा होता है। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार मृतात्मा अपने सूक्ष्म एवं कारण शरीर के साथ तेरह दिनों तक घर में ही विचरण करती है। इसके पश्चात् वह परलोक में विचरण करती है।
यह कहानी Jyotish Sagar के July 2026 संस्करण से ली गई है।
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