Facebook Pixel आज भी भड़कते हैं 'शोले' | Outlook Hindi - news - इस कहानी को Magzter.com पर पढ़ें

कोशिश गोल्ड - मुक्त

आज भी भड़कते हैं 'शोले'

Outlook Hindi

|

September 01, 2025

यह सिर्फ फिल्म ही नहीं बल्कि जीवन का फलसफा है, जो गहराई से उतरने पर साफ नजर आता है, इसका हर पात्र जीवन की है प्रेरणा

- अरविंद मण्डलोई

आज भी भड़कते हैं 'शोले'

सम्मोहन की पराकाष्ठा तर्क-बुद्धि को शांत कर देती है और उसके मोहपाश में बंधे लोग मायालोक में पहुंच जाते हैं। ऐसे मायालोक हिंदुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया की लोक परंपरा का हिस्सा हैं, जिनकी दास्तान रवायतों के जरिये पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुंचने का सिलसिला आज भी जारी है। ये वही दास्तानें हैं, जो हमारी दादियों-नानियों की जुबानी, सर्द रातों में अलाव तापते या गर्मी में घरों की छतों पर ठंडी हवाओं का सुख लेते हुए हमसे रूबरू हुई हैं। कहानियां कहां से शुरू होती हैं और उनका अंत कहां होता है, ये मायने नहीं रखता बल्कि जो समां वे बांधे रखती हैं, वही उसकी जान है।

आज तो बच्चा पैदा होते ही मोबाइल के कैमरे में देखते हुए मुस्कुराने लगता है, आंख खोलते ही उसकी पहली 'स्माइल पिक' खींची जाती है और वह कहानियों के लोक में नहीं, गूगल के लोक में प्रवेश कर जाता है। जल्द ही उसकी उंगलियां तय करती हैं कि वह किस लोक में जाएगा और वह एनिमेशन की दुनिया में पहुंच जाता है। यह अलग बात है कि एनिमेटेड दुनिया के खलनायक, गब्बर से ज्यादा क्रूर हैं। वे गांव या 50 कोस तक ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में खौफ पैदा करना चाहते हैं; वह भी दुनिया के खात्मे की शर्त पर। ऐसे में शोले का गब्बर उनका प्यादा बनने लायक भी नहीं। बावजूद इसके गब्बर का तिलिस्म या कहें शोले का तिलिस्म आधी सदी के बाद भी आज तक बरकरार है और उसके सम्मोहन में चार पीढ़ियां बंधी हैं।

इस आधी सदी में कई दास्तानें कही गईं, पर वे इसके मुकाबले पीछे कहीं दिखाई नहीं देती। आज भी इसका जादू कुछ इस तरह कायम है कि इस फिल्म को कहीं से भी देखना शुरू करें, ये अंत तक आपको अपने साथ-साथ लिए चलती है।

इस कहानी को सलीम-जावेद की जोड़ी यानी सलीम खान और जावेद अख्तर ने लिखा। कहानी यानी सिनेमा की भाषा में कहें तो इसकी कथा-पटकथा और संवाद लेखक सलीम-जावेद थे। पर इस कहानी की रीढ़ यानि संवाद लेखन का काम अकेले जावेद अख्तर ने ही किया। ये वे संवाद हैं, जो आज हमारी भाषा में मुहावरों की तरह शरीक हो चुके हैं।

image

Outlook Hindi

यह कहानी Outlook Hindi के September 01, 2025 संस्करण से ली गई है।

हजारों चुनिंदा प्रीमियम कहानियों और 10,000 से अधिक पत्रिकाओं और समाचार पत्रों तक पहुंचने के लिए मैगज़्टर गोल्ड की सदस्यता लें।

क्या आप पहले से ही ग्राहक हैं?

Outlook Hindi से और कहानियाँ

Outlook Hindi

Outlook Hindi

कविता सियासत के मायने

पारिवारिक विवाद और पिता से मतभेद के बीच कविता राजनीति में पैर जमाने को तत्पर

time to read

4 mins

May 25, 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

परदादा की विरासत

ऋषि कपूर की मौजूदगी ने परदे पर मुहब्बत की नई परिभाषा गढ़ी, जिसने चॉकलेटी हीरो की सीमा से बाहर निकल कर नायिकाओं के साथ प्यार को परदे पर भी कमाई का साधन बना दिया

time to read

8 mins

May 25, 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

सन्नाटा क्यों है भाई?

टूर्नामेंट शुरू होने में दो महीने से भी कम समय लेकिन भारत के मीडिया अधिकार की बोली अभी तक नहीं लगी, जबकि 2022 में यह टूर्नामेंट 40 अरब मिनट देखा गया था

time to read

4 mins

May 25, 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

छोटे शहर लाइव

ऑरेंज इकोनॉमी महानगरों से आगे छोटे शहरों में ज्यादा दिलचस्पी पैदा कर रही और खूब कमाई कर रही

time to read

6 mins

May 25, 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

अभिशप्त अस्तित्व कथा

यथास्थिति को भी रंग बदलते देखा है...।

time to read

3 mins

May 25, 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

साइबर सुरक्षा उपाय

सबके लिए इंटरनेट की सुलभता और व्यापक पहुंच ने मानव जीवन को तीव्रगामी और आधुनिक बनाया है, वहीं दूसरी ओर गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी तमाम चिंताएं भी बढ़ाई हैं।

time to read

2 mins

May 25, 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

हैट्रिक का दमखम

भाजपा गठजोड़ की लगातार तीसरी बड़ी जीत से हिमंता और मजबूत, पार्टी की पूर्वोत्तर में राजनैतिक पकड़ के लिए अहम

time to read

5 mins

May 25, 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

जब कैमरा बोला करता था...

रघु राय का कैमरा बोलता था।

time to read

4 mins

May 25, 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

रंगास्वामी लौटे

राजनीति के उस्ताद खिलाड़ी को दोबारा गद्दी, कांग्रेस के साथ इंडिया ब्लॉक की उलझन उसे ले डूबी

time to read

2 mins

May 25, 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

साहस कथा की हीरा

आज जब हमें एप्स्टीन फाइल में बच्चियों और किशोरियों के यौन-उत्पीड़न की जानकारियां विचलित कर रही हैं, तब रुचिरा गुप्ता के उपन्यास को पढ़ना और भी जरूरी हो जाता है।

time to read

2 mins

May 25, 2026

Listen

Translate

Share

-
+

Change font size