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देश में बदलेगी खेल की तस्वीर

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November - 2025

देश में आखिरी बार साल 2001 में राष्ट्रीय खेल नीति तैयार की गई थी। इसके बाद तमाम सरकारें आईं लेकिन किसी ने खेल नीति में बदलाव की ज़रूरत महसूस नहीं की जबकि इस दौरान न केवल खेल की तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव हुए बल्कि खेलों को लेकर लोगों का नज़रिया भी 360 डिग्री तक बदल गया। अब नई खेल नीति बनकर तैयार है। नई खेल नीति में क्या खास है, बता रहे हैं जाने-माने वरिष्ठ खेल पत्रकार अनंत मिश्र।

- By अनंत मिश्र

देश में बदलेगी खेल की तस्वीर

अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी जैसे देशों में पहले उनके खेल बजट से कहीं ज्यादा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा का बजट होता था। ऐसे में इन देशों ने खेलों को बढ़ावा देकर और फिटनेस को जन आंदोलन के रूप में स्थापित किया। उसके बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के बजट में भारी कमी देखने को मिली। इन देशों को मानना है कि जब उसके देश के नागरिक फिट रहेंगे तो स्वस्थ भी रहेंगे। चिकित्सा पर उनका खर्च कम होगा। इस पर भारत ने भी गंभीरता से विचार किया है। यही कारण है कि नई खेल नीति में फिटनेस और खेलों को जन आंदोलन बनाने की बात कही गई है। देश की आबादी का 65 फीसदी हिस्सा 35 वर्ष से कम लोगों का है। खेल नीति में इन युवाओं को टारगेट किया गया है।

साल 1951 में दिल्ली में हुए पहले राष्ट्रीय खेलों के आयोजन ने साफ कर दिया था कि भारत खेलों को लेकर बेहद गंभीर है। देश ने यह भांप लिया था कि खेल ही आने वाले दिनों में विकास का मानक होंगे। खेलों के विकास के लिए कई बार नीतियां बनीं। देश में आखिरी बार साल 2001 में राष्ट्रीय खेल नीति तैयार की गई थी। इसके बाद तमाम सरकारें आईं लेकिन किसी ने खेल नीति में बदलाव की ज़रूरत नहीं महसूस की जबकि इस दौरान न केवल खेल की तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव हुए बल्कि खेलों को लेकर लोगों का नज़रिया 360 डिग्री तक बदल गया। पिछली जुलाई में केंद्र सरकार ने नई खेल नीति 2025 को स्वीकृत किया। यह नई खेल नीति भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने का एक रोडमैप भी है। भारत पहली दफा अपनी जमीन पर 2036 के ओलंपिक की मेजबानी करने का सपना पाले हुए है। इसके लिए उसने लामबंदी भी शुरू कर दी है। ऐसे में यह नई खेल नीति खास महत्व रखती है। यूं तो देश में एक नीति के तहत ही खेल संचालित होते आ रहे हैं लेकिन इस खेल नीति का खेल संघों, खेल प्रशासकों और खेल मंत्रालय ने अपने-अपने हिसाब से इस्तेमाल किया। इसे कई बार तोड़ा-मरोड़ा भी गया। खेल विशेषज्ञों को यही डर सता रहा है कि कहीं इस नई खेल नीति के साथ भी ऐसा ना हो। नई खेल नीति का ड्राफ्ट पढ़ने में बेहद दिलचस्प है। यह कारगर भी दिखता है और भविष्य में इसके तमाम फायदे भी नज़र आ रहे हैं। अगर ईमानदारी से इस पर अमल हुआ तो बेशक भविष्य में इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।

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