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शीतकालीन चारधाम यात्रा में भी गुलजार होगी देवभूमि

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December 2024

शीतकाल के छह महीने भगवान बदरी विशाल की पूजा चमोली जिले में स्थित योग-ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर व नृसिंह मंदिर जोशीमठ, बाबा केदार की पूजा रुद्रप्रयाग जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ और मां गंगा व देवी यमुना की पूजा क्रमशः उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगा मंदिर मुखवा (मुखीमट) और यमुना मंदिर खरसाली (खुशीमठ) में होती है।

शीतकालीन चारधाम यात्रा में भी गुलजार होगी देवभूमि

चारधाम यात्रा समाप्त होने के साथ ही प्रदेश सरकार ने शीतकालीन चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। वैसे तो उत्तराखंड में पिछले कई वर्षों से कवायद चल रही है कि ग्रीष्मकाल की भांति शीतकाल में भी यहां पर्यटक पहुंचे। इसी क्रम में पिछले साल से सरकार ने तैयारी की थी कि अब राज्य में शीतकालीन चारधाम यात्रा होगी। शुरुआती चरण में भले ही सरकार को काफी अधिक सफलता न मिली हो, लेकिन इस दिशा में तेजी से प्रयास चल रहे हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने चारोंधाम के मंदिरों के कपाट बंद होने के साथ ही दूसरे साल की चारधाम यात्रा और शीतकालीन यात्रा के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके लिए उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर चारधाम यात्रा प्राधिकरण का गठन करने के भी निर्देश दिए हैं। बताते चलें कि चारधाम के कपाट बंद होने के बाद उत्तराखंड में चारधाम के शीतकालीन गद्दीस्थल तो हैं ही। इसके अलावा कई धार्मिक महत्व के ऐसे स्थल हैं जहां पूरे साल श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इनकी संख्या सीमित रहती है। सरकार इस संख्या को बढ़ाना चाहती है ताकि राज्य का आर्थिक विकास तेजी सेहो।

शीतकाल के छह महीने भगवान बदरी विशाल की पूजा चमोली जिले में स्थित योग-ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर व नृसिंह मंदिर जोशीमठ, बाबा केदार की पूजा रुद्रप्रयाग जिले में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ और मां गंगा व देवी यमुना की पूजा क्रमशः उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगा मंदिर मुखवा (मुखीमठ) और यमुना मंदिर खरसाली (खुशीमठ) में होती है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि इन स्थानों की यात्रा का भी चारधाम सरीखा ही माहात्म्य है। इसलिए जो तीर्थयात्री किन्हीं कारणों से चारधाम नहीं पहुंच पाते, उन्हें शीतकालीन में गद्दी स्थलों पर दर्शन करने चाहिएं। इस यात्रा के दौरान प्रकृति की सुंदरता को निहारने के साथ आप आसपास स्थित खूबसूरत पर्यटन स्थलों का दीदार भी कर सकते हैं।...तो आइए! शीतकालीन चारधाम यात्रा पर चलें।

योग-ध्यान बदरी मंदिर

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