कोशिश गोल्ड - मुक्त
बुलडोजर के विकास से गहराते रिश्ते
DASTAKTIMES
|September 2023
वर्ष 2013-14 से वर्ष 2021-21 तक यानि सात वर्ष में बैंकों और वित्तीय संस्थाओं द्वारा मंजूर परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी सिर्फ 4 प्रतिशत थी। वर्ष 2021.22 में इन परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़कर 12.8 प्रतिशत हुई। लगातार दो वर्षों में सबसे अधिक परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में लगाने के प्रस्ताव किए गए। वर्ष 2028 तक उत्तर प्रदेश 515 अरब डालर की अर्थ व्यवस्था के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा आर्थिक रूप से सम्पन्न राज्य होगा।
बुलडोजर के औद्योगीकरण से क्या रिश्ते हो सकते हैं? बहुत कुछ, यदि बात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बुलडोजर की हो। औद्योगीकरण की समस्या कोई नई नहीं हैं। सरकार दर सरकार इसकी कोशिशें करती रही हैं और उसको लेकर झूठे-सच्चे प्रचार भी करती रही हैं, लेकिन अब हकीकत सामने आ रही है। रिजर्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 22-23 में देश के बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने जितनी परियोजनाओं को मंजूरी दी है, उनमें 16 प्रतिशत से अधिक अकेले उत्तर प्रदेश की हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश में लगाने के लिए मंजूर 57 प्रतिशत परियोजनाएं सिर्फ 5 राज्यों में हैं इनमें उत्तर प्रदेश का नम्बर सबसे उपर है। इसके बाद गुजरात, ओडिशा, महाराष्ट्र और कर्नाटक का नम्बर आता है। यह चमत्कार कैसे हुआ?
वर्ष 2013-14 से वर्ष 2021-21 तक यानि सात वर्ष में बैंकों और वित्तीय संस्थाओं द्वारा मंजूर परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी सिर्फ 4 प्रतिशत थी जबकि गुजरात 14 और महाराष्ट्र 13 प्रतिशत के साथ सबसे आगे थे। वर्ष 2021.22 में इन परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़कर 12.8 प्रतिशत हुई। लगातार दो वर्षों में सबसे अधिक परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में लगाने के प्रस्ताव किए गए। वर्ष 2028 तक उत्तर प्रदेश 515 अरब डालर की अर्थ व्यवस्था के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा आर्थिक रूप से सम्पन्न राज्य होगा। यह सब कच्चे माल की उपलब्धता, कुशल श्रमिकों और ढांचागत सुविधाओं की उपलब्धता, आपूर्ति की स्थिति और बाजार के आकार व उत्पादों की मांग पर निर्भर करता है। एक और महत्वपूर्ण योगदान कानून व्यवस्था की स्थिति का होता है। पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश में एक प्रक्रिया अनवरत रूप से चल रही है। सरकारें आती हैं, बड़े धूमधड़ाके के साथ 'नई' औद्योगिक नीति की घोषणा करती हैं। फिर वे चली जाती हैं और जिनके लिए यह नीति बनती है, वे वहीं के वहीं मुंह टापते खड़े रह जाते हैं। फिर इंतजार होने लगता है अगली नई सरकार के आने का और एक और ताजी 'नई' नीति की घोषणा का।
यह कहानी DASTAKTIMES के September 2023 संस्करण से ली गई है।
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