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गर्मी नाशक, रोग रक्षक-मट्ठा
Sadhana Path
|April 2021
पुराने जमाने से ही मट्ठा (छाछ) हमारे खान-पान का एक अहम हिस्सा रहा है, क्योंकि यह पाचन में हल्का, शक्तिदायक और रोगनाशक पेय है। इसीलिए हमारे प्राचीन चिकित्सा ग्रन्थों में इसे अमृत तुल्य बताया गया है। मट्ठे की कढ़ी बड़ी स्वादिष्ट और पाचक होती है। उत्तर भारत में मट्टे की स्वादिष्ट और पौष्टिक लस्सी बड़े चाव से पी जाती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इसकी उपयोगिता देखते हुए आजकल मट्ठा पीने का प्रचलन इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि कई शहरों में इसकी दुकानें खुलने लगी हैं।
दूध से दही बनने पर उसके गुण बहुत अधिक बढ़ जाते हैं और दही जब मढे का रूप ले लेता है, तब तो वह दही से भी अधिक गुणकारी बन जाता है। अब तो इस तथ्य को अन्य चिकित्सा पद्धतियां भी स्वीकारने लगी हैं। प्रोफेसर ड्यूकेल और मैचनीकाफ जैसे विश्व प्रसिद्ध जीवशास्त्रियों का कहना है कि मट्ठे में मौजूद लैक्टिव' नामक जीवाणु आंतों में क्रियाशील हानिकारक कीटाणुओं
Cette histoire est tirée de l'édition April 2021 de Sadhana Path.
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