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विश्व आर्थिक मंच का खुलासा गरीबी हेतु औपनिवेशवाद और बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ हैं जिम्मेदार

Rishi Prasad Hindi

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September 2025

मति की मंदता के कारण सारे दुःख, सारे रोग और सारे अपराध होते हैं।

- रामेश्वर मिश्र

(गतांक के '...१३५ वर्षों में भारत से ५६,३०,२६,५२० करोड़ लूटे' का शेष)

अंग्रेजों ने भारत की भौतिक सम्पदा ही नहीं बल्कि उसकी गहन ज्ञान-सम्पदा को भी लूटा। उन्होंने पहले भारतीयों को संस्कृत के ज्ञान से वंचित कर दिया ताकि वे अपने पुरातन ग्रंथ न पढ़ सकें और फिर उनके दिमाग में यह भर दिया कि 'अंग्रेजी साहित्य की केवल आधी अलमारी (bookshelf) सभी भारतीय ग्रंथों से अधिक मूल्य रखती है।' यह एक अविश्वसनीय झूठ था किंतु भारतीय इसकी सच्चाई समझ नहीं पाये। इस बीच अंग्रेजों और मिशनरियों ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों का भारी निर्यात शुरू कर दिया। एक प्रामाणिक स्रोत के अनुसार केवल ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में कुछ वर्ष पहले हिन्दी या संस्कृत में लिपिबद्ध लगभग ८००० ग्रंथ संग्रहित होने की पुष्टि मिलती है।

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