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कर्म करने से सिद्धि अवश्य मिलती है
Rishi Prasad Hindi
|October 2024
गतासूनगतासुंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः ॥
जो विद्वान होते हैं वे शोकग्रस्त कभी नहीं होते। उनकी हार कभी होती ही नहीं। वे दुःख के सामने हारते नहीं, वे भय के सामने हारते नहीं, मोह के सामने हारते नहीं। चरैवेति चरैवेति... उनका मंत्र होता है चलो चलो, चलो-चलो।
एक कथा है महाभारत के उद्योग पर्व में। एक था राजकुमार। जब उसके पिताजी की मृत्यु हो गयी तो उसके शत्रुओं ने उसको घेर लिया। उसकी सेना मजबूत नहीं थी और वह अभी समझता भी नहीं था कि क्या करना चाहिए? युद्ध में से भाग आया और घर में आकर सो गया। जब उसकी माता को मालूम पड़ा कि हमारा बेटा युद्ध में हार के घर में आकर सोया है, उसने उसको जगाया और बोली कि "बेटा ! तुम मनुष्य हो, सोने के लिए तुम्हारा जन्म नहीं हुआ। सोने के लिए तो अजगर पैदा होता है। प्रमाद करना या असावधान रहना भी एक प्रकार से सोना ही है।"
उसने उपदेश किया :
"उत्थातव्यं जागृतव्यं योक्तव्यं भूतिकर्मसु ॥
Esta historia es de la edición October 2024 de Rishi Prasad Hindi.
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