Intentar ORO - Gratis
ध्वनि प्रदूषण का गहराता संकट
Jansatta
|September 27, 2025
देश के बड़े शहरों में ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है। इसके बावजूद करोड़ों लोग अब भी ध्वनि प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। इसका कारण पर्यावरण को लेकर शासन-प्रशासन का उदासीन रवैया और राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है।
देश में ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए बड़े शहरों में निगरानी तंत्र स्थापित किए गए हैं। इसके बावजूद करोड़ों लोग अब भी ध्वनि प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। इसका कारण पर्यावरण को लेकर शासन-प्रशासन का उदासीन रवैया और राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से वर्ष 2011 में शुरू की गई 'नेशनल एंबिएंट नाइज मानिटरिंग नेटवर्क' (एनएएनएमएन) योजना का उद्देश्य शुरुआत में देश के सात प्रमुख महानगरों में सत्तर यांत्रिक तंत्र स्थापित कर ध्वनि प्रदूषण की वास्तविक समय में निगरानी करना था, ताकि आंकड़ों के आधार पर उचित नीतिगत हस्तक्षेप संभव हो सके। मगर धरातल पर इस योजना का कोई प्रभाव नजर नहीं आ रहा है।
इस योजना की शुरुआत देश के सात शहरों में पैंतीस 'रियल-टाइम मानिटरिंग स्टेशनों' के साथ हुई थी। योजना के दूसरे और तीसरे चरण में इसका विस्तार क्रमशः पैंतीस नए केंद्रों के साथ करने की बात कही गई थी, लेकिन वर्ष 2021-23 तक यह तंत्र केवल आठ शहरों तक ही पहुंच पाया। जिनमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, लखनऊ और बंगलुरु भी शामिल हैं। हालांकि, इसमें भी जमीनी हकीकत काफी अलग है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जैसे शहरों में यह प्रणाली एक निष्क्रिय 'डैशबोर्ड' तक सीमित रह गई, जहां न तो ध्वनि प्रदूषण के आंकड़े वास्तविक समय में दर्ज हो रहे हैं, न आम नागरिकों को इसकी जानकारी है। न ही कोई ठोस नीतिगत कार्रवाई सामने आई है। जिन केंद्रों पर यह तंत्र ठीक से काम कर रहा है, वहां आंकड़ों का अध्ययन करने और उसके आधार पर नीति बनाने की पहल भी कम ही नजर आती है। इस योजना के तहत तीन प्रमुख शांत क्षेत्रों में दर्ज ध्वनि स्तर दिन में 65-70 डेसिबल (ए) तक पहुंच गया, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से निर्धारित सीमा 40-50 डेसिबल (ए) है। यानी यह तंत्र अपने मूल उद्देश्य और नीतिगत हस्तक्षेप की नींव तैयार करने में विफल रहा है।
Esta historia es de la edición September 27, 2025 de Jansatta.
Suscríbete a Magzter GOLD para acceder a miles de historias premium seleccionadas y a más de 9000 revistas y periódicos.
¿Ya eres suscriptor? Iniciar sesión
MÁS HISTORIAS DE Jansatta
Jansatta
'टी20 विश्व कप के स्थल को बदलने की बांग्लादेश की मांग स्वीकार नहीं'
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने सोमवार को संकेत दिया कि वह भारत में होने वाले टी20 विश्व कप मुकाबलों के स्थल को बदलने की बांग्लादेश की मांग को शायद स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि देश की सुरक्षा चिंताओं पर एक आकलन रपट में खतरे की आशंका को 'कम' बताया गया है।
1 min
January 13, 2026
Jansatta
'जेएनयू में नारेबाजी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, इससे देश स्तब्ध'
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों से पूरा देश स्तब्ध है।
1 min
January 13, 2026
Jansatta
कौशल विकास योजना में बड़ा घोटाला, जांच हो
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
1 mins
January 13, 2026
Jansatta
स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बहस, चर्चा और असहमति आवश्यक तत्व : राधाकृष्णन
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में 460 से अधिक विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई
2 mins
January 13, 2026
Jansatta
पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन व सात्विक-चिराग की जोड़ी पर रहेंगी निगाहें
इंडिया ओपन टूर्नामेंट आज से
2 mins
January 13, 2026
Jansatta
ईरान बातचीत के लिए राजी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा
3 mins
January 13, 2026
Jansatta
ई-सिगरेट मामले में होगी कड़ी कार्रवाई
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा
1 mins
January 13, 2026
Jansatta
रायल चैलेंजर्स बेंगलुरू ने यूपी वारियर्स को नौ विकेट से हराया
ग्रेस ने 40 गेंद में 85 रन तो स्मृति ने 32 गेंद में खेली नाबाद 47 रन की पारी
2 mins
January 13, 2026
Jansatta
दूरस्थ ग्रहों के वायुमंडल में जीवन के संकेत तलाशने में जुटे खगोलविद
खगोल विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने दी जानकारी| पृथ्वी जैसे छोटे, पथरीले ग्रहों का पता लगाना अभी कठिन
2 mins
January 13, 2026
Jansatta
चांदी 2,65,000 रुपए प्रति किग्रा, सोना 1,44,600 प्रति 10 ग्राम पर
सफेद और पीली धातु के भाव नए शिखर पर
3 mins
January 13, 2026
Listen
Translate
Change font size
