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प्रदूषण से संकट में समुद्री जीवन
Jansatta Lucknow
|August 25, 2025
एक तरफ अंधाधुंध तरीके से समुद्री जीवों का शिकार किया जा रहा है, तो दूसरी ओर समुद्र में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव इस समस्या को और ज्यादा गंभीर बना रहा है।
समुद्र के बिगड़ते पारिस्थितिकी तंत्र की समस्या को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक आगाह करते रहे हैं।
मगर मनुष्य के निजी स्वार्थ, लापरवाही और अनदेखी करने की प्रवृत्ति के कारण समुद्री जीवन का दम घुट रहा है। दुनिया के तीन अरब से अधिक लोग अपनी गुजर-बसर के लिए समुद्री जीवों पर निर्भर हैं, लेकिन इस संपदा को बनाए रखने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। गैरकानूनी तरीके से मछलियां पकड़ने, प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की वजह से समुद्री जैव विविधता पर संकट गहराने लगा है। ऐसे में महासागरों के साथ ही वैश्विक आबादी के भविष्य को बचाने के लिए अब गंभीरता से प्रयास करना जरूरी हो गया है, क्योंकि सरकारों, व्यावसायिक संरक्षकों और मछुआरों के लिए प्राथमिकताएं तय कर दिए जाने के बावजूद मुनाफे की होड़ में कोई भी अपने दायित्व को समझने और उस पर पूरी तरह अमल करने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि एक तरफ अंधाधंध तरीके से समुद्री जीवों का शिकार किया जा रहा है, तो दूसरी ओर समुद्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव इस समस्या को और ज्यादा गंभीर बना रहा है।
पेरिस समझौते में बढ़ते वैश्विक औसत तापमान में कमी लाने के लिए लक्ष्य निर्धारित होने के बावजूद भू-मध्यसागर का तापमान बढ़ने की गति वैश्विक औसत से बीस फीसद अधिक हो चुकी है। महासागरों की सेहत बचाने के प्रयासों को वास्तव में बल मिलता है या फिर केवल संकल्पों का पुलिंदा, यह देशों और समुदायों द्वारा पेश किए जाने वाले उपायों और समाधानों पर निर्भर है। महासागरों के उपयोग में बड़ा बदलाव केवल मछलियां पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तरीकों से भी जुड़ा हुआ है। इस समय साठ फीसद से अधिक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र क्षरण का शिकार है। एक आकलन के मुताबिक, वर्ष 2040 तक प्लास्टिक का प्रदूषण वर्तमान स्थिति से करीब दोगुना हो जाएगा। हर वर्ष महासागरों में जाने वाले प्लास्टिक कचरे की मात्रा 2.3 से 3.7 करोड़ टन तक हो जाएगी।
Esta historia es de la edición August 25, 2025 de Jansatta Lucknow.
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