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ईरान ही है दोषी और हिंसक

Dakshin Bharat Rashtramat Bengaluru

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June 16, 2025

ई रान और इस्राइल युद्ध की कसौटी पर तीन प्रश्न अति महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें जानना जरूरी है, तभी हम ईरान और इस्राइल युद्ध की आवश्यकता और अनावश्यकता को चिन्हित कर सकते हैं।

- आचार्य श्रीहरि

सबसे पहले तो इस अवधारणा को भी अस्वीकार कर लीजिये कि हमेशा शांति और सदभाव से ही किसी भी समस्या का समाधान हो सकता है। कभी-कभी हिंसा के बल पर भी शांति और सदभाव सुनिश्चित होती है। इसका सीधा उदाहरण अमेरिका और जापान है। दूसरे विश्वयुद्ध में जापान हिटलर के समूह में था और जापान ने बिना कुछ सोचे-समझे अमेरिका पर हमला कर दिया, जबकि अमेरिका की तटस्थता थी और वह प्रत्यक्ष तौर पर दूसरे विश्व युद्ध में शामिल नहीं था, अप्रत्यक्ष तौर पर वह ब्रिटेन को जरूर मदद कर रहा था, ब्रिटेन को हथियार आपूर्ति कर रहा था। अमेरिका ने अपने ऊपर हमले का बहुत बड़ा प्रतिकार लिया, जापान के दो प्रमुख शहरों नागाशाकी और हिरोशिमा पर परमाणु बम गिरा दिया। भयंकर रक्तपात हुआ और फिर जापान अहिंसक देश बन गया। हथियार त्याग दिया, युद्ध छोड़ दिया, सेना रखना बंद कर दिया, सिर्फ रचनात्मकता अपनायी और अपने को आर्थिक शक्ति बनाया। आज जापान दुनिया की छठे नंबर की अर्थव्यवस्था है। जापान और अमेरिका आज अमिट मित्र हैं। कहने का अर्थ यह है कि दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति कोई गांधी-बुद्ध के अहिंसक उद्घोषों नहीं हुई थी, शांति की अपील से नहीं हुई थी, कोई सार्थक संवाद और समझौते से नहीं हुई थी बल्कि अमेरिका के बम वर्षा से उत्पन्न कारणों से हुई थी, जापान, जर्मनी, इटली के मित्र देशों की पराजय और विनाश हुई थी। इसके पीछे हथियारों की हिंसा थी, रक्तपिशाचुओं के संहार के पीछे भी जवाबी हिंसा थी, जवाबी युद्ध था। सबसे खास बात यह है कि दुनिया भर की मुस्लिम आतंकी संगठन जवाबी और प्रतिकार वाली हिंसा से ही नियंत्रित रहते हैं।

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