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धर्म का असल काम है मानवता की पीड़ा को दूर करना
Dainik Bhaskar Chhindwara
|June 08, 2025
इ स समय पूरे विश्व में धर्म या मजहब के नाम पर चलने वाले आतंकवाद से बड़ी कोई समस्या नहीं है। वैसे मानव-अमानव के बीच आदिकाल से संघर्ष चलता आ रहा है। ऋग्वेद में भी ऋषियों ने इस पर चर्चा की है। पुरातन काल से इंसानियत और शैतानियत के बीच भिड़ंत होती रही है। हमारे पुराणों में भी कई दानव हुए हैं, जिनके नाम आज भी यदा-कदा सुनने को मिलते ही रहते हैं, जैसे हिरण्यकश्यप, नरकासुर, बकासुर आदि। इससे आगे बढ़कर हम कुछ और नामों को भी याद कर सकते हैं। हिटलर, मुसोलिनी, जोसेफ स्टालिन और ओसामा बिन लादेन। एक और भयावह नाम है अबु बक्र अल-बगदादी।
हमारे सामने एक तरफ वे निर्दोष लोग हैं, जो प्रकृति के बीच रहते हैं और दूसरे वे हैं जो यह मानते हैं कि धर्म की रक्षा खून बहाने वाले कामों से होती है। जब शैतान मारा जाता है, तो भारत के अलावा किस देश में मानवाधिकारों की बात उठती है? लादेन को अमेरिकी कमांडो ने एबटाबाद में उसके घर में घुसकर मार डाला था। उसे मारने में स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुलेआम उल्लंघन हुआ था। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने साथियों के साथ पूरे ऑपरेशन पर नजर रखे हुए थे। अब सवाल यह उठता है कि क्या ओबामा अपने उन बहादुर कमांडो को जेल भेजने की हिमाकत कर सकते थे?
दाऊद इब्राहिम को पकड़ते समय यदि कोई पुलिस अधिकारी उस पर गोली चलाता है, तो उसे क्या गुनाहगार मानेंगे? बकासुर को मारने वाले भीम को क्या जेल में डाल देंगे? बकासुर जब तक जीवित रहता, तब तक रोज एक निर्दोष नागरिक मारा जाता।
Esta historia es de la edición June 08, 2025 de Dainik Bhaskar Chhindwara.
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