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भरोसेमंद एआई एजेंट तक पहुंच में भारत की भूमिका
Business Standard - Hindi
|January 06, 2026
भारत अपनी डिजिटल यात्रा में अगली बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है।
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एक दशक पहले हमने, जनसंख्या के एक बड़े वर्ग को ध्यान में रखकर, विशिष्ट पहचान वाले आधार और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) जैसे तंत्र बनाए जिससे विशिष्ट पहचान और भुगतान सभी के लिए सुलभ हो गए। ये मंच इसलिए कारगर रहे क्योंकि वे सरल, सुरक्षित और कम लागत वाले होने के साथ ही सार्वभौमिक उपयोग के लिए डिजाइन किए गए थे। अब जब आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) रोजमर्रा के जीवन में प्रवेश कर रही है, हमें एक नई सार्वजनिक प्राथमिकता के लिए उसी स्पष्ट उद्देश्य को अपनाना होगा। प्रत्येक भारतीय की एक सुरक्षित और विश्वसनीय एआई एजेंट तक पहुंच होनी चाहिए जो उन्हें जानकारी का प्रबंधन करने, सेवाओं और निर्णय लेने की उनकी क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सके।कई लोगों के लिए, एक एजेंट मुख्य डिजिटल इंटरफेस बन जाएगा जिसके माध्यम से वे जानकारी हासिल करते हैं, कोई नया कौशल सीखते हैं और सरकार तथा निजी, दोनों सेवाओं के लिए संवाद करते हैं। एक किसान को मौसम और मिट्टी से जुड़ी जानकारी समय-समय पर चाहिए होती है। एक छात्र को परीक्षाओं या भाषा से जुड़े अभ्यास के लिए मदद की आवश्यकता हो सकती है। एक मरीज, एक एजेंट के जरिये प्रिस्क्रिप्शन को समझने और सेहत से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए कर सकता है। एक छोटा कारोबार अपने काम को सरल करने के लिए, लॉजिस्टिक्स और नियमों के अनुपालन के लिए एक एजेंट की ओर रुख कर सकता है। इन इस्तेमाल को तभी साकार किया जाएगा जब हम सभी के लिए एक समावेशी संरचना का निर्माण करेंगे।
एक समावेशी एजेंट संरचना को वास्तव में चार आवश्यकताओं के जरिये परिभाषित करना चाहिए।
सबसे पहले, इन एआई एजेंटों को भारत की गोपनीयता सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए। एजेंट स्वास्थ्य, वित्त, शिक्षा और दैनिक जीवन से जुड़े संवेदनशील डेटा को संभालेंगे। उपयोगकर्ताओं को पता होना चाहिए कि कौन-सी जानकारी एकत्र की जाती है और इसका उपयोग कैसे किया जाता है। पारदर्शिता और भरोसे के बिना, राष्ट्रीय स्तर पर कोई भी तंत्र सफल नहीं होगा।
Esta historia es de la edición January 06, 2026 de Business Standard - Hindi.
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