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विदेशी निवेशकों के मन में भारत की छवि
Business Standard - Hindi
|November 06, 2025
भारत के प्रति निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ा है लेकिन उनमें अभिरुचि की कमी एक विपरीत सकारात्मक संकेत हो सकती है। बता रहे हैं आकाश प्रकाश
पिछले दिनों मुझे वैश्विक निवेशकों के साथ कुछ समय बिताने का अवसर मिला। इनमें से कुछ तो पूंजी के सबसे चतुर दीर्घकालिक आवंटकों में शुमार हैं और उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। वे इस उद्योग को नेतृत्व भी प्रदान करते रहे हैं। इतने वर्षों से लगातार यह सब करते हुए मुझे भी यह समझ आने लगा है कि कैसे समय के साथ प्राथमिकताएं और थीम बदल सकती हैं।
मेरे लिए इनमें से प्रमुख हासिल क्या रहा? इस यात्रा के दौरान मुझे भारत को लेकर जितनी उदासीनता देखने को मिली उतनी पहले कभी नहीं दिखी थी। ये हालात 20 वर्ष पहले की याद दिला रहे थे। मेरी मुलाकात सबसे हुई लेकिन इसके पीछे उनकी विनम्रता और पुराने रिश्ते ही बड़ी वजह थे। एक भी बैठक ऐसी नहीं हुई जहां लोगों ने भारत के बाजारों में निवेश का इरादा जताया हो। वे भारत के बारे में जानकारी पाकर खुश थे और यह तर्क समझ सकते थे कि भारत सापेक्ष प्रदर्शन के मामले में अब क्यों अपने निम्नतम बिंदु पर पहुंच चुका है, यानी यहां से यह ऊपर ही जाएगा। परंतु किसी भी प्रकार की कार्रवाई को लेकर उनका कोई झुकाव नहीं था। यह काफी गंभीर बात है।
भारत को लेकर वही पुरानी चिंताएं हैं। मूल्यांकन बहुत अधिक है। आर्थिक और आय के क्षेत्र में कोई गति नहीं है। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में हमारी कोई तरक्की नहीं है, न ही हम इसके लाभार्थी हैं और हम लोकलुभावनवाद में उलझे हुए हैं। कई वर्षों में पहली बार मुझे सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 7 फीसदी के स्तर पर टिकाऊ बने रहने को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा। पहले इसे स्वाभाविक माना जाता था। पहली बार मुझे ऐसे सवालों का सामना करना पड़ा कि क्यों भारत निम्न मध्य आय वाले देश के रूप में अटका नहीं रह सकता?
Esta historia es de la edición November 06, 2025 de Business Standard - Hindi.
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