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समय के साथ बदलती रही डाक व्यवस्था
Aaj Samaaj
|October 08, 2025
भारत में डाकघर का इतिहास ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के समय से शुरू होता है जब रॉबर्ट क्लाइव ने 1766 में पहली डाक व्यवस्था स्थापित की। वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1774 में कोलकाता में पहला डाकघर खोला और 1854 में लॉर्ड डलहौजी ने भारत में एक राष्ट्रीय डाक सेवा की शुरूआत की। आज भारतीय डाक दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्क में से एक है जो बैंकिंग, बीमा और अन्य सेवाओं के साथ आम आदमी का भरोसेमंद साथी है।
पूरी दुनिया में 9 अक्तूबर को विश्व डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1874 में इसी दिन यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का गठन करने के लिए स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में 22 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। 1969 में जापान के टाकियो शहर में आयोजित सम्मेलन में विश्व डाक दिवस के रूप में इसी दिन को चयन किये जाने की घोषणा की गयी थी। एक जुलाई 1876 को भारत यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बनने वाला भारत पहला एशियाई देश था। जनसंख्या और अंतरराष्ट्रीय मेल ट्रैफिक के आधार पर भारत शुरू से ही प्रथम श्रेणी का सदस्य रहा है। भारत में डाकघर का इतिहास ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के समय से शुरू होता है जब रॉबर्ट क्लाइव ने 1766 में पहली डाक व्यवस्था स्थापित की। वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1774 में कोलकाता में पहला डाकघर खोला और 1854 में लॉर्ड डलहौजी ने भारत में एक राष्ट्रीय डाक सेवा की शुरूआत की। आज भारतीय डाक दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्क में से एक है जो बैंकिंग, बीमा और अन्य सेवाओं के साथ आम आदमी का भरोसेमंद साथी है। 1 अक्टूबर 1854 में भारतीय डाक विभाग की स्थापना के साथ ही भारत में पहली बार डाक टिकट भी जारी किया गया था। विश्व डाक दिवस का मकसद देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में डाक क्षेत्र के योगदान के बारे में जागरूकता पैदा करना है। दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष 150 से ज्यादा देशों में विविध तरीकों से विश्व डाक दिवस आयोजित किया जाता है। भारतीय डाक प्रणाली का जो उन्नत और परिष्कृत स्वरूप आज हमारे सामने है। वह लंबे सफर की देन है। अंग्रेजों ने डेढ़ सौ साल पहले अलग-अलग हिस्सों में अपने तरीके से चल रही डाक व्यवस्था को एक सूत्र में पिरोने की पहल की थी। उन्होंने भारतीय डाक को एक नया रूप
Esta historia es de la edición October 08, 2025 de Aaj Samaaj.
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