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उइगर मुसलमानों पर चीन का जुल्म कितना सच कितना झूठ
Sarita
|July First 2025
चीन के शिनजियांग इलाके में बसने वाले उइगर मुसलमानों को ले कर बहुत सी खबरें पढ़ने को मिलती हैं. इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीन की बहुत आलोचना होती है. कहा जाता है कि चीन की सरकार ने बड़े स्तर पर उइगर मुसलमानों का नरसंहार किया, उन्हें बेवजह जेलों में ठूंसा. इन बातों में कितना सच है और कितना प्रोपगंडा, जानें आप भी.
चाइना यानी चीन घोषिततौर पर एक नास्तिक देश है. धर्म या ईश्वर की किसी फिलौसफी को चीन की सरकार नहीं मानती. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यह तय करती है कि उस की पार्टी का प्राथमिक सदस्य भी नास्तिक हो. चीन की एक बड़ी आबादी बुद्धिस्ट है. इस के बावजूद चीन की सरकार बुद्धिज्म के खिलाफ भी मोरचा खोले हुए नजर आती है. चीन ने पिछले कुछ दशकों में बड़ी संख्या में बुद्धिस्ट गुरुओं को जेलों में ठूंसा, बौद्धमठों को ध्वस्त किया और आसपास के बौद्ध देशों से आने वाले भिक्षुओं पर प्रतिबंध लगाया है. बहुसंख्यक आबादी बुद्धिस्ट होने के बावजूद चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने धर्म को राजनीति का हथियार नहीं बनने दिया बल्कि हर वह कोशिश की जिस से धर्म की उद्दंडता को काबू में किया जा सके.
चीन घोषित तौर पर नास्तिक देश है. वहां सरकार किसी धार्मिक फिलौसफी पर यकीन नहीं करती. इस कारण वहां धार्मिक स्थलों को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता.
पिछले 10 सालों में चीन ने 80 हजार से ज्यादा बौद्धमठों को खत्म किया. 2 हजार से ज्यादा गिरजाघरों को मिट्टी में मिला दिया और तकरीबन 16 हजार मसजिदों को रातोंरात गायब कर दिया. इस से यह बात तो स्पष्ट हो जाती है कि सभी धर्मों को ले कर चीन का रवैया एक सा है. यही कारण है कि और देशों की तरह चीन की सड़कों पर धर्म का नंगा नाच नहीं होता और चीन में कभी सांप्रदायिक दंगे या बम विस्फोट की घटनाएं भी घटित नहीं होतीं.सेक्युलरिज्म किसी भी डेमोक्रेसी की रीढ़ की हड्डी होती है लेकिन यह तभी सफल होता है जब सत्ता और धर्मों के बीच दूरी बनी रहे. धर्म और राजनीति दोनों का गठजोड़ किसी भी लोकतंत्र को तबाही की ओर ही ले जाता है. सियासत में मजहब की घुसपैठ न हो, यह डेमोक्रेसी की पहली शर्त है लेकिन इस शर्त पर दुनिया के बड़ेबड़े लोकतंत्र भी फेल होते नजर आते हैं. भारत, रूस, यूरोप और अमेरिका भी डेमोक्रेसी की इस बुनियादी शर्त पर खरे न उतर सके. वहीं चीन इस मामले में दुनिया के लिए एक मिसाल बन कर उभरा है. सैकुलरिज्म के नाम पर मजहबों को मनमानी करने की छूट देने के बुरे नतीजे आज दुनिया झेलने को मजबूर है. चीन ने धर्मों की उस भयानक उद्दंडता से तो छुटकारा पा ही लिया है.
Esta historia es de la edición July First 2025 de Sarita.
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