Intentar ORO - Gratis
बिहार में क्या गुल खिलाएगी कांग्रेस
Sarita
|April First 2025
बिहार के चुनाव पर देशभर की नजर लगी है. कांग्रेस लालू प्रसाद के साथ तालमेल करेगी या फिर उन के साथ केजरीवाल जैसा व्यवहार करेगी?
बिहार विधानसभा के लिए चुनाव होने वाले हैं. लोकसभा चुनाव 2029 के दृष्टिकोण से ये चुनाव देश की राजनीति को बदलने वाले साबित हो सकते हैं. सेहत और राजनीति दोनों हिसाब से नीतीश कुमार अपने सब से कमजोर दौर में हैं. कांग्रेस दिल्ली जैसा फैसला बिहार में लेने की दिशा में आगे बढ़ रही है. पार्टी को मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने कर्नाटक के कृष्णा अल्लावुरु को बिहार कांग्रेस का प्रभारी बनाया है. दो दशक से बिहार कांग्रेस लालू प्रसाद यादव के अनुसार चली है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या कृष्णा अल्लावुरु लालू प्रसाद यादव के साथ तालमेल बैठा पाएंगे ?
बिहार विधानसभा के पिछले चुनाव 2020 में हुए थे. उस में जदयू और भाजपा व अन्य दलों का गठबंधन था. वह गठबंधन 243 सीटों पर चुनाव लड़ा. उन में से जदयू 115 सीटों पर लड़ा और 43 सीटें जीतीं, भाजपा 110 पर लड़ी जिन में 74 जीतीं, वीआईपी और हम ने मिला कर 18 सीटों पर चुनाव लड़े और वे 8 सीटें जीते.
कुल 243 में से 128 सीटें जीत कर एनडीए ने सरकार बनाई. नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने. उसी चुनाव में कांग्रेस और राजद ने कुल 110 सीटें जीतीं. राजद 144 पर लड़ा और 75 सीटें जीता, कांग्रेस 70 पर लड़ी मगर 19 सीटें ही जीत सकी. राजद खेमे का कहना है कि अगर कांग्रेस बेहतर लड़ी होती तो नतीजे अलग होते. इस नजर से राजद और कांग्रेस के फैसले पर 2025 का विधानसभा चुनाव टिका है.
बिहार से पलटती है राजनीति
देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश के बाद सब से प्रमुख चुनाव बिहार के होते हैं. उस से देश की राजनीति का अंदाजा लगाना स्वाभाविक हो जाता है. एक दौर में राजनीतिक और सामाजिक क्रांति बिहार से ही शुरू होती थी. कांग्रेस की सब से मजबूत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किला ध्वस्त करने का काम जेपी आंदोलन से ही हुआ था, जो बिहार से शुरू हुआ था. 1990 में बिहार ने एससी और ओबीसी की ताकत को एकजुट कर के सामंतशाही को उखाड़ फेंका था. इस के बाद ऊंची जातियों ने ओबीसी और एससी को अलगथलग कर के वापस अपनी सत्ता बना ली.
Esta historia es de la edición April First 2025 de Sarita.
Suscríbete a Magzter GOLD para acceder a miles de historias premium seleccionadas y a más de 9000 revistas y periódicos.
¿Ya eres suscriptor? Iniciar sesión
MÁS HISTORIAS DE Sarita
Sarita
कैरम
अपनों से जुड़ने का अनोखा खेल
3 mins
December First 2025
Sarita
बैकबेंचर्स
जब से केरल में सर्कुलर जारी हुआ है कि क्लासरूम में अब कोई बैकबैंचर नहीं होगा तब से बैकबैंचर्स की नींद उड़ गई है. कैसे लेंगे वे पीछे बैठ कर मस्ती करने का सुख?
4 mins
December First 2025
Sarita
आदिवासी
भीमा तो बस गांव में आदिवासियों की जीवनशैली देखने गया था, लेकिन फिर क्यों सीबीआई उस के पीछे हाथ धो कर पड़ गई थी? जब भीमा पुलिस के हत्थे चढ़ा तो अंत अकल्पनीय रहा.
10 mins
December First 2025
Sarita
एबौर्शन
निशा आज उसी दोराहे पर खड़ी थी जिस पर कभी उस की मां खुद उद्विग्न सी छटपटा रही थी. मगर आज उचित मार्गदर्शन करने के बजाय वह निशा पर उबल पड़ी थी. आखिर क्यों?
7 mins
December First 2025
Sarita
पौराणिक फिल्मों के पीछे अंधविश्वास या कुछ और
पौराणिक फिल्में हमेशा से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में बनती रहीं मगर उन का स्केल बहुत बड़ा नहीं होता था, अब उन का स्केल बड़े स्तर पर होने लगा है, आखिर क्या है इस की वजह, जानिए.
7 mins
December First 2025
Sarita
औरतों के जिस्म पर मर्दों की मर्जी क्यों
शादी के बाद पति को अपनी पत्नी के साथ कुछ भी करने का अधिकार मिल जाता है.
6 mins
December First 2025
Sarita
दान के धन पर सिर्फ ब्राह्मणों का हक ?
मंदिरों में दान आम लोग देते हैं, यदि उस का कुछ हिस्सा सरकार उन के ही विकास कार्यों में खर्च करती है तो गलत क्या है? हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का इस मामले में निर्देश ब्राह्मणों पर दान के पैसों पर पूरा अधिकार देने जैसा है.
11 mins
December First 2025
Sarita
बिहार चुनाव सत्तावाद में डूब गया समाजवाद
बिहार में एनडीए गठबंधन भारी बहुत से जीत गया है.
11 mins
December First 2025
Sarita
बड़ा मकान कितना नफानुकसान
बड़ा मकान हर किसी का सपना होता है जो अब, होम लोन के जरिए ही सही, साकार होने लगा है.
12 mins
December First 2025
Sarita
असलीनकली का फंडा पोल्ट्री फार्म का अंडा
भारत में अंडे के आहार को ले कर जबतब बहस चलती रहती है. अंडा आखिर है क्या? खाने और न खाने वालों के अपने मत हैं. बावजूद इस के, अंडा आज भी अपनी जगह पर न सिर्फ कायम है बल्कि बड़ी मात्रा में खाया भी जाता है.
4 mins
December First 2025
Listen
Translate
Change font size
