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शिक्षा के पक्षधर थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

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October 2023

महात्मा गांधी को विद्यार्थियों से मिलना-जुलना और उनसे बातें करना पसंद था। वे स्कूलों, कॉलेजों और विश्व विद्लायों में भी अक्सर जाते थे। वे एक बार मास्टर जी की भी भूमिका में आ गए थे। वे पहली बार 12 मार्च 1915 को राजधानी दिल्ली आए तो सेंट स्टीफंस कॉलेज में ठहरे। वे वहां पर छात्रों और फेक्टी से भी मिले। उनके साथ सामयिक सवालों पर लंबी चर्चाएं की।

- आरके सिन्हा

शिक्षा के पक्षधर थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

दरअसल उन्हें दिल्ली प्रवास के दौरान सेंट स्टीफंस कॉलेज में रूकने का आग्रह उनके करीबी सहयोगी दीनबंधु सी. एफ. एंड्रयूज ने किया था। दीनबंध एंड्रयूज उसी दिल्ली ब्रदरहुड सोसायटी से जुड़े हुए थे जिसने सेंट स्टीफंस कॉलेज और सेंट स्टीफंस अस्पताल की स्थापना की थी। यहाँ के छात्रों पर गांधी जी और एंड्रयूज का असर न हो यह नहीं हो सकता। यहां की दीवारों पर अभी भी गांधीजी और एंड्रयूज के चित्र टंगे हैं। सेंट स्टीफंस कॉलेज की स्थापना दिल्ली में ब्रदरहुड ऑफ दि एसेंनडेंड क्राइस्ट ने सन 1877 में हुई थी। अब इसे दिल्ली ब्रदरहुड सोसायटी कहा जाता है। दिल्ली ब्रदरहु सोसायटी के फादर सोलोमन बताते हैं कि सेंट स्टीफंस कॉलेज को भले ही ब्रिटेन की एक मिशनरी ने शुरू किया पर इसकी भारत तथा यहां के लोगों के प्रति निष्ठा और समर्पण असंदिग्ध रहा। दीनबंधु एंड्रयूज ब्रिटिश नागरिक होते हुए भी भारत की आजादी के प्रबल पक्षधर थे। इसी से अंदाजा लग जाएगा कि सेंट स्टीफंस कॉलेज को खोलने वाली संस्था का मूल चरित्र किस तरह का है। गांधी जी यहां 1918 तक रहे। उन्हें यहां पर ब्रजकृष्ण चांदीवाला नाम के एक छात्र मिले जो आगे चलकर उनके पुत्रवत हो गए। उन्होंने ही गांधी जी की मृत्यु के बाद अंतिम बार स्नान करवाया था। गांधीजी का काशी से भी गहरा लगाव था। वे अपने जीवनकाल में 12 बार काशी आए। अपना पहला राजनीतिक उद्बोधन गांधीजी ने 5 फरवरी 1916 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दिया था। सेंट्रल हिंदू कॉलेज परिसर में काशी हिंदू विश्वविद्यालय का स्थापना समारोह मनाया जा रहा था। साथ में बीएचयू के संस्थापक पं. मदन मोहन मालवीय, एनी बेसेंट, दरभंगा के महाराजा रामेश्वर सिंह के साथ कई रियासतों के राजा वहां मौजूद थे। गुजराती वेशभूषा (

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